भाई था मस्कुलर एट्रोफी से पीड़ित इलाज के लिए बहन ने जुटाए 46 करोड़ लेकिन खुद की इसी बीमारी से मौत

भाई था मस्कुलर एट्रोफी से पीड़ित इलाज के लिए बहन ने जुटाए 46 करोड़ लेकिन खुद की इसी बीमारी से मौत

कोच्चि। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) बीमारी से पीड़ित 16 साल की अफरा की मौत हो गई। मौत से पहले अफरा अपने भाई को जीवनदान दे गई। अफरा का भाई मोहम्मद भी इसी बीमारी से पीड़ित था। अफरा ने भाई के इलाज के लिए क्राउड फंडिंग से 46 करोड़ रुपए इकट्ठे करने में सफल रहीं। लेकिन उसकी खुद उस बीमारी से मौत हो गई। कन्नूर के मट्टूल की रहने वाली अफरा ने कोझीकोड के एक निजी अस्पताल में बीमारी के कारण दम तोड़ दिया। एसएमए से संबंधित जटिलताएं विकसित होने के बाद पिछले कुछ दिनों से खुद अफरा का भी अस्पताल में इलाज चल रहा था। भाई-बहन दोनों ही एक ही आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित थे।

भाई को लगा 18 करोड़ रुपए का इंजेक्शन

डॉक्टरों ने बताया था कि अफरा के भाई मोहम्मद को दो साल की उम्र तक पहुंचने से पहले ही 18 करोड़ रुपए की खुराक की दवा जोल्गेन्स्मा देनी पड़ेगी। खुद व्हीलचेयर के सहारे अपना जीवन जी रही अफरा ने पिछले साल जून में वीडियो के जरिए लोगों से पैसे जुटाने के लिए मदद मांगी। अफरा ने लोगों से अपील करते हुए कहा था कि इस बीमारी के कारण मेरे पैर और रीढ़ की हड्डी मुड़ गई है। मेरे लिए लेटना और सोना भी मुश्किल है।

10वीं में पढ़ने वाली अफरा का था डॉक्टर बनने का सपना

रफीक और मरियम्मा की बेटी अफरा सफा इंग्लिश मीडियम स्कूल की दसवीं की छात्रा थी। वह डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। अफरा के भाई को पिछले साल 24 अगस्त को दवा दी गई थी और उसकी फिजियोथेरेपी चल रही है। क्राउड फंडिंग से जमा हुई अतिरिक्त धनराशि से समिति ने दो अन्य एसएमए प्रभावित बच्चों के इलाज के लिए धनराशि उपलब्ध कराई है और शेष 12 करोड़ रुपए एसएमए प्रभावित बच्चों के इलाज के लिए राज्य सरकार को सौंप दिए।