दोस्ती को बिजनेस पार्टनरशिप में बदल कर विश्वास और प्रेम की डोर को दी मजबूती

दोस्ती को बिजनेस पार्टनरशिप में बदल कर विश्वास और प्रेम की डोर को दी मजबूती

 दोस्ती महज एक शब्द नहीं है। देखा जाए तो दोस्ती दो दोस्तों के बीच के रिश्ते को गहराई देने का वो शब्द है जो विश्वास की डोर से पूरी तरह बंधा हुआ होता है। आज फ्रेंडशिप डे है और आईएम भोपाल आपको ऐसे ही दोस्तो से परिचित कराने जा रहा है, जो साथ पले और बढ़े तो है। लेकिन उन्होंने अपनी दोस्ती को अब बिजनेस पार्टनरशिप में बदल कर विश्वास और प्रेम की डोर को और मजबूती दी है। पढ़िए ऐसे ही दोस्तों की कहानी।

दिल मिले तो मिला कारोबार

विराग कहते हैं कि आरजीपीवी यूनिवर्सिटी में अनुराग और पलक से 2016 में मुलाकात हुई थी, हम क्लासमेट थे, तो रोजाना मिलना होता था। हमने 2018 में राग इनोवेशन मशीन पर काम शुरू किया, उन्होंने बताया गांव में सेनेटरी नेपकिन की जानकारी लोगों में नहीं थी, जिसके लिए हमने अवेयरनेस कार्यक्रम भी चलाए। जिसके बाद राग इनोवेशन मशीन को तैयार किया है। अनुराग ने जयपुर में इस तरह की कम लागत वाले पैड निर्माण मशीन देखी थी, जिसके बाद यह आइडिया आया। इसके बाद उस मशीन से कम लागत वाली मशीन पर रिसर्च की। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कच्चे माल पर शोध करना शुरू किया। अभी देशभर में 200 से अधिक मशीन को लगा चुके है।

दोस्ती जैसा कोई रिश्ता नहीं

असीम जौहरी कहते हैं कि अजय तिवारी से 2015 और 2018 में अंकित शिवदेसानी से मिला। दोनों कॉलेज फ्रेंड है। मुझे और अंकित को बिजनेस करना था। हमने स्टार्टअप इंवेंटोहैक डिवाइस तैयार की है, जो कि किसानों के लिए काफी फायदेमंद है। इसकी मदद से एक एकड़ जमीन मिट्टी की जांच 15 मिनट में की जा सकती है। असीम कहते है कि अंकित के साथ खाद्य पदार्थों में बढते रासायनिक उपयोग को देखकर, किसानो के पास जाकर समस्या समझकर उसका हल खोजा और फिर स्टार्टअप शुरु किया। इससे उनकी दोस्ती और गहरी हो गई। आज स्थिति यह है कि वह अपने घर के साथ-साथ अन्य कार्यों में भी बढ़चढ़कर भाग लेते हुए मदद करते हैं। वे यह भी कहते हैं कि दोस्ती से बढ़कर कोई नहीं है।

फ्रेंड मिला तो शुरू किया बिजनेस

शिवम यादव कहते हैं कि कार्तिक से 2019 में कॉलेज के एक इवेंट के दौरान मुलाकात हुई थी, जिसके बाद हम मिलते रहे। हम दोंनो बिजनेस पर अलग-अलग तरह की बाते करने लगे। उन्होंने बताया कि पैसों के अभाव में हम अक्सर कुछ चीजें खरीद नहीं पाते। अक्सर अपनी ड्रेस, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट जैसे मोबाइल, लैपटॉप या फिर कोई ज्वेलरी खरीदने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। इस परेशानी का सॉल्यूशन ढूंढ निकाला। हमने रेंटोजो नाम से स्टार्टअप शुरू किया है। हमने एक ऐप बनाया है, जिसकी मदद से आप कपड़ों से लेकर घर, गाड़ी सहित कई चीजें रेंट पर ले सकते हैं। इनका ऐप यूजर्स के लिए पूरी तरह से फ्री है।