250 करोड़ का होटल 7.50 करोड़ में बेचने का आरोप, सीबीआई की विशेष अदालत ने अरुण शौरी समेत 5 के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए 

 17 Sep 2020 12:52 PM  31

नई दिल्ली।  उदयपुर के लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को बाजार मूल्य से बहुत कम दाम में बेचने के मामले में अरुण शौरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। जोधपुर में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने 2002 में सरकार द्वारा संचालित होटल में कथित भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामले में अरुण शौरी, पूर्व विनिवेश सचिव प्रदीप बैजल और तीन अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। 
होटल की बिक्री से सरकार को 244 करोड़ रुपये के कथित नुकसान के मामले में सीबीआई की एक क्लोजर रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए जज ने यह आदेश दिया। सीबीआई रिपोर्ट में कहा गया था कि विनिवेश प्रक्रिया में अभियुक्तों के खिलाफ अभियोजन शुरू करने के लिए कोई सबूत नहीं थे। अदालत ने कहा कि उन्हें अरेस्ट वारंट के जरिए तलब किया जाना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने उदयपुर जिला कलेक्टर को होटल को तुरंत कब्जे में लेने के लिए आदेश दिए। बता दें कि अरुण शौरी 1999-2004 के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार में केंद्रीय संचार, सूचना प्रौद्योगिकी एवं विनिवेश मंत्री थे।
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश पूरन कुमार शर्मा ने यह भी आदेश दिया कि उदयपुर के लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को राज्य सरकार को सौंप दिया जाए। होटल को पहले भारतीय पर्यटन विकास निगम द्वारा चलाया जाता था, मगर 2002 में इसे भारत होटल्स लिमिटेड को बेच दिया गया, जो अब ललित ग्रुप आॅफ होटल्स चलाता है।

अदालत ने इस मामले में केंद्रीय एजेंसी सीबीआई के तर्क से असहमति जताई और एक क्लोजर रिपोर्ट पेश करने के लिए आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि तत्कालीन मंत्री अरुण शौरी और तत्कालीन सचिव प्रदीप बैजल ने अपने पदों का दुरुपयोग किया और सौदे में केंद्र सरकार को 244 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। 

इस मामले में तीन अन्य आरोपी  आशीष गुहा, तत्कालीन निवेश फर्म लाजार्ड इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक कांतिलाल करमसी विकमसे, तत्कालीन मूल्यांकन फर्म कांति करमसी एंड कंपनी के प्रमुख और भारत होटेल्स लिमिटेड के चेयरपर्सन और ज्योत्सना सूरी के प्रबंध निदेशक हैं।