सुन और बोल नहीं सकते लेकिन हौसले बुलंद, कोई मूर्तिकार तो कोई पेंटिंग सीख भर रहा सपनों में रंग

सुन और बोल नहीं सकते लेकिन हौसले बुलंद, कोई मूर्तिकार तो कोई पेंटिंग सीख भर रहा सपनों में रंग

इंदौर। मूक-बधिर बच्चों के लिए संकेतों से अपनी भावनाओं को कहने के अलावा कोई और तरीका नहीं होता। अब यही तरीका उनके आत्मनिर्भर बनने का रास्ता बन गया है। वर्ल्ड डेफ डे पर इन बच्चों ने अपनी इच्छाओं को संकेतों के माध्यम से पीपुल्स समाचार को बताया। मप्र के कुछ शहरों में मूक-बधिर बच्चों के लिए विशेष स्कूल शुरू हुए हैं। ये स्कूल इन्हें भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं...1

सबसे अच्छा मूर्तिकार बनना है

जबलपुर के मूक-बधिर स्कूल के 12वीं कक्षा के छात्र यशवंत ने इशारों में बताया कि वे सबसे अच्छा मूर्तिकार बनना चाहते हैं। हाल ही में यशवंत ने गणेश जी की प्रतिमा भी बनाई है। यशवंत ने बताया कि वे अपने साथियों से साइन लैंग्वेज में पूरी बात करते हैं। इसी स्कूल से पढ़कर निकले हेमंत ठाकुर ने बताया कि वे ड्राइंग, क्लेरिकल काम के साथ कई काम अच्छे तरीके से कर सकते हैं। अब वे सरकारी नौकरी के लिए प्रयास कर रहे हैं।

पेंटिंग में बनाना है कॅरियर

कक्षा 5वीं के मूक-बधिर छात्र सरकार सिंह बैस साइन लैंग्वेज सीखने के बाद अपनी बात टीचर्स को अच्छी तरह से कम्युनिकेट कर पाता है। सरकार ने बताया -वैसे टीचर्स हमारी बात समझ जाते हैं। टीचर्स की वजह से मैं पेंटिंग सीख पाया हूं और इसी विधा में आगे बढ़ना चाहता हूं। मैं ज्यादातर समय स्कूल में बिताना पसंद करता हूं, क्योंकि दोस्तों से जितनी चाहें बातें कर पाता हूं। हमें समझने के लिए और भी लोग साइन लैंग्वेज सीखें। यूट्यूब व ऑनलाइन कोर्स भी इसके लिए उपलब्ध हैं।

मूक-बधिर बच्चों को फ्री में डिप्लोमा 

अब देश भर के मूक-बधिर बच्चों को साइन लैंग्वेज डिप्लोमा कोर्स मुफ्त में कराया जाएगा। इंदौर की आनंद सर्विस सोसायटी की पहल के बाद इसे केंद्र सरकार ने स्वीकार करते हुए 23 जुलाई को नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। सोसायटी के डायरेक्टर ज्ञानेंद्र पुरोहित ने बताया कि अभी तक मूक-बधिरों के लिए संचालित होने वाले साइन लैंग्वेज डिप्लोमा कोर्स के लिए अलग-अलग राज्यों में 60 से 80 हजार रुपए की फीस ली जाती थी। कई बच्चे इससे वंचित रह जाते थे। इसे लेकर सोसाइटी ने 28 दिसंबर 2022 को सांसद शंकर लालवानी को एक पत्र लिखकर मूक-बधिरों को उनकी मातृभाषा साइन लैंग्वेज में डिप्लोमा कोर्स को फ्री करने का आग्रह किया था।