ऑनलाइन गेमिंग और महंगे शौक पूरे करने अच्छे घरों के बच्चे मांग रहे भीख

ऑनलाइन गेमिंग और महंगे शौक पूरे करने अच्छे घरों के बच्चे मांग रहे भीख

भोपाल। महंगा शौक और ऑनलाइन गेमिंग की लत बच्चों को घर की दहलीज लांघने पर मजबूर कर रही है। अच्छे घरों के ये बच्चे शौक पूरा करने के लिए मां-बाप से छुपकर भीख मांग रहे हैं और पान-गुटखा बेच रहे हैं। पिछले ढाई महीने में ऐसे दर्जन भर बच्चे श्रम विभाग, रेलवे और सिटी चाइल्ड लाइन द्वारा रेस्क्यू किए गए हैं। ये सभी बच्चे संपन्न घरों से ताल्लुक रखते हैं। काउंसलिंग में इन बच्चों ने बताया कि माता-पिता उन्हें पैसे देने से इंकार कर देते थे। इसलिए वे पैरेंट्स के काम पर जाते ही घर से निकल जाते हैं और ऐसा एरिया चुनते हैं, जहां उन्हें पहचाने जाने की संभावना न हो। अभिभावकों ने काउंसलिंग में बताया कि उन्हें भनक तक नहीं थी कि बच्चे क्या कर रहे हैं। वे दिन में उनसे फोन पर बात कर लेते थे, लेकिन उन्हें इसका बिलकुल भी अंदाजा नहीं था।

ढाई महीने में 12 बच्चे रेस्क्यू, कोई सड़कों पर भीख मांगता, तो कोई ट्रेनों में गुटखा बेचता मिला

केस-1 हाल ही में श्रम विभाग और चाइल्ड लाइन की टीम को 11 साल का बच्चा भीख मांगता मिला। काउंसलिंग में बच्चे ने बताया कि पिता की एक मॉल में दुकान है। मां भी व्यवसाय चलाती हैं। बच्चे के अनुसार, फेवरेट गेम खेलने के लिए उसे पैसों की जरूरत थी। माता-पिता काम पर चले जाते, तो वह अपने पुराने कपड़ों को पहनकर भीख मांगने निकलता था, ताकि पैसे जमा कर सके। शाम को 7 बजे के पहले घर पहुंचकर कपडेÞ छुपा देता था, ताकि किसी को पता नहीं चले।

केस-2 गोविंदपुरा क्षेत्र में एक बच्चा सड़क पर पेन-पेंसिल बेचता मिला। दस साल के बच्चे ने बताया कि पिता सरकारी विभाग में बाबू हैं और मां अरेरा कॉलोनी में अपना बुटीक चलाती हैं। बच्चे को फेवरेट कोरियन बैंड का फोटो एलबम खरीदना था, जो तीन हजार रुपए का था। पैरेंट्स ने मना किया तो उसने पैसा इकट्ठा करने के लिए चोरी-छिपे यह काम शुरू कर दिया।

केस-3 4 वर्षीय बच्चा ट्रेन में गुटखा और छोटा-मोटा अन्य सामान बेचता मिला। पिता का इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का बिजनेस है और मां डायटीशियन हैं। काउंसलिंग में बच्चे ने बताया कि उसे सिगरेट और मोबाइल गेमिंग की लत है। अभिभावक पैसे का हिसाब मांगते हैं। उन्हें यह सब नहीं बता सकता, इसलिए पैंरेंट्स के काम पर जाते ही घर से निकल जाता था।1

केस-4 भीख मांगते हुए आठ साल के एक बच्चे को रेस्क्यू किया गया। काउंसलिंग के दौरान उसने बताया कि उसे गियर वाली साइकिल खरीदनी थी। पैरेंट्स ने कहा कि जब पुरानी साइकिल छोटी पड़ने लग जाएगी, तब नई साइकिल खरीदेंगे। पैरेंट्स मोबाइल गेम के लिए भी पैसा नहीं देते थे। इसलिए शौक पूरा करने के लिए उसे यही सबसे अच्छा रास्ता नजर आया।

बच्चों से दोस्ताना व्यवहार जरूरी

ऐसे मामलों में सबसे बड़ी समस्या है माता-पिता का बच्चों को समय न दे पाना। कम्युनिकेशन गैप और अकेलेपन के चलते बच्चे मनमानी करने लगते हैं। वहीं, कुछ पैरेंट्स हर बात में बच्चों को मना करते हैं। वक्त बदल चुका है, ऐसे में बच्चों के नजरिए से सोचने की भी जरूरत है। उनकी हर मांग पूरी न करें, लेकिन उन्हें समझाएं कि उनके लिए क्या बेहतर है और क्या गलत। - दिव्या दुबे मिश्रा, मनोवैज्ञानिक