घर के काम कराने से तेज हो जाता है बच्चों का दिमाग

घर के काम कराने से तेज हो जाता है बच्चों का दिमाग

केनबरा। बच्चों से नियमित तौर पर घर के काम करवाने से उनका अकादमिक प्रदर्शन एवं समस्या समाधान करने का कौशल बेहतर हो जाता है। ऑस्ट्रेलिया की ला ट्रोब यूनिवर्सिटी के एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है। पीएचडी अभ्यर्थी डेन्ना टेप्पर की अगुवाई में किया गया यह अध्ययन ऑस्ट्रेलिया के आक्यूपेशनल थैरेपी में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन में यह पाया गया कि नियमित तौर पर घर के काम करने का संबंध बेहतर एक्जीक्यूटिव फंक्शन्स जैसे - योजना बनाना, आत्म-अनुशासन और निर्देशों को याद रखने से होता है। अध्ययन के नतीजे यह संकेत देते हैं कि खाना बनाना या बागवानी जैसे कार्य करवाना बच्चों के लिए विशेष रूप से लाभदायक होता है। टेप्पर का कहना है कि पैरेंट्स को अपने बच्चों से उनकी उम्र और क्षमता के अनुरूप काम करवाना आना चाहिए।

बेहतर होती है जीवन के अन्य क्षेत्रों में परफॉर्मेंस

ऐसे बच्चे जो नियमित तौर पर परिवार के लिए भोजन बनाते हैं या फिर बगीचे की खरपतवार साफ करते हैं, उनके जीवन के अन्य क्षेत्रों जैसे स्कूल के काम या समस्या समाधान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की संभावना अधिक होती है। अध्ययन में 5 से 13 वर्ष उम्र के 207 बच्चों के पैरेंट्स या गार्जियन को शामिल किया गया। एक प्रश्नावली के जरिए यह जानकारी एकत्रित की गई कि उनके बच्चे रोजाना घर का कितना काम पूरा करते हैं तथा उनका एक्जीक्यूटिव फंक्शन कैसा है।

याददाश्त और समझने की शक्ति बढ़ जाती है

अध्ययन में रिसर्चर्स ने यह पाया कि खुद की देखभाल के काम जैसे, अपने लिए भोजन बनाना तथा पारिवारिकदेख् ाभाल के कार्य जैसे - किसी और के लिए खाना बनाने से याददाश्त और सोचने-समझने की शक्ति बढ़ती है। पूर्व के अध्ययनों में यह पाया गया है कि बच्चों को उनकी उम्र के मुताबिक घरेलू कार्यों में लगाने से उनमें स्वतंत्रता की अनुभूति बढ़ती है। इसका संबंध विकसित सामाजिक व्यवहार एवं जीवन संतुष्टि से जुड़ा होता है।