कवर्ड नालों की सफाई बनी नगर निगम के लिए चुनौती, सफाई के नाम पर बरत रहे औपचारिकता

कवर्ड नालों की सफाई बनी नगर निगम के लिए चुनौती, सफाई के नाम पर बरत रहे औपचारिकता

जबलपुर । शहर के कवर्ड नाले नागरिकों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। इनकी मूल चौड़ाई को चौथाई हिस्से से कम में कर बारिश में होने वाले तेज प्रवाह से शहर के दर्जनों इलाकों में जलप्लावन शहर की नियति बन चुकी है। इनकी सफाई आज भी नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालाकि नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग लगातार दावे करता है कि वे शत-प्रतिशत नालों की सफाई करवा रहे हैं मगर हकीकत इसके उलट है। जिसका अनुभव निगमायुक्त अनूप कुमार सिंह खुद निरीक्षण केदौरान कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि इन नालों के नर्माण के बाद से ही इनकी सफाई के लिए सक मशीन वाहन बुलाने के प्रस्ताव को आज तक नगर निगम पूरा नहीं कर पाया है। नतीजतन इन नालों के अंदर की सफाई का दावा कितना भी किया जाए मगर ये साफ नहीं होते हैं। साल भर अपने अंदर भारी गंदगी समेटे ये नाले बारिश में उफनाते हैं और अपनी गंदगी बाहर उड़ेलते हैं जो लोगों के घरो में भर जाती है।

ये इलाके डूबते हैं हर साल

अधारताल के गाजीनगर, रामनगर, संजीवन अस्पताल का इलाका।

कछियाना लार्डगंज के पीछे का हिस्सा।

बल्देवबाग से लगी संगम कॉलोनी व अन्य कॉलोनियां।

पारिजात बिल्डिंग के पीछे स्टेट बैंक, सिंगल स्टोरी, डबल स्टोरी कॉलोनी, सरस्वती कॉलोनी, जगदम्बा कॉलोनी इत्यादि।

गढ़ा गंगानगर चंदन कॉलोनी व इससे लगी अन्य कॉलोनियां।

घमापुर का कोरी मोहल्ला, चौधरी मोहल्ला, कुचबंधिया मोहल्ला।

उपनगरीय इलाकों की बस्तियां, गढ़ा, गुप्तेश्वर, रांझी, ग्वारीघाट।

गोलबाजार एवं सिविक सेंटर।