गांवों में रुकने लगे कलेक्टर, रात में लग रहीं चौपालें; हरदा में 30 साल बाद मिला मालिकाना हक, बालाघाट में बढ़ा मत्स्य उत्पादन

गांवों में रुकने लगे कलेक्टर, रात में लग रहीं चौपालें; हरदा में 30 साल बाद मिला मालिकाना हक, बालाघाट में बढ़ा मत्स्य उत्पादन

भोपाल। कलेक्टरों को ज्यादा से ज्यादा समय फील्ड में रहने और गांव में रात बिताने संबंधी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशों का असर कुछ जिलों में दिखने लगा है। इनमें एक जिला हरदा है। यहां के कलेक्टर ऋषि गर्ग हμते में दो दिन गांवों के दौरे करते हैं और समस्याएं सुलझाते हैं। रात के समय चौपाल भी लग जाती है। इस तरह एक दिन में सात-आठ गांवों में जाना होता है। एक गांव में 30-40 शिकायतें मिल जाती हैं। कलेक्टर ऋषि गर्ग ने भ्रमण के दौरान ग्राम झाडपा में चौपाल लगाई। यहां बुजुर्ग मांगीलाल ने बताया कि उन्होंने 30 साल पहले रामसरोस से भूमि खरीदी की थी, लेकिन उसने आजतक रजिस्टर्ड बिक्री पत्र नहीं दिया। कलेक्टर ने कुछ ही घंटों में मांगीलाल को मालिकाना हक दिलवा दिया। नयागांव में अंगूरी बाई ने बताया कि वह दिव्यांग हैं, लेकिन पेंशन नहीं मिल रही। बैंक खाता भी नहीं खुल रहा। कलेक्टर ने जनपद सीईओ को पेंशन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी। अंगूरी का बैंक खाता 12 घंटे के अंदर खुल गया और पेंशन स्वीकृति के आदेश भी हो गए। कलेक्टर ने बताया कि वे जिस गांव में जाते हैं उससे पहले कोटवार और ग्राम सेवक के माध्यम से गांव वालों से शिकायतें एक रजिस्टर में दर्ज करवा ली जाती हैं। इसके बाद हर शिकायत का परीक्षण होता है। सचिव, पटवारी स्तर की शिकायत मौके पर ही दूर होती है। बजट वाली मांग को परीक्षण में रखते हैं। इस तरह एक दिन में 40-50 शिकायतों का निराकरण हो जाता है।

सतना में कलेक्टर ने शुरू करवाए समर कैंप

सतना में प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में समर कैंप की शुरुआत की जा रही है। कलेक्टर अनुराग वर्मा के माध्यम से 11 से 21 मई तक समर कैंप हो रहे हैं। जिला मुख्यालय सहित विकास खंड स्तर के कुल 19 विद्यालयों में कैंप लगेंगे।

बालाघाट में 20 हजार लोगों को मिला रोजगार

बालाघाट कलेक्टर डॉ.गिरीश कुमार मिश्रा ने जिले में मत्स्य पालन की ओर किसानों को आकर्षित किया है। अब 20 हजार मत्स्य पालकों को रोजगार मिल रहा है। डॉ.मिश्रा बताते हैं कि जिले में 2020 ग्रामीण तालाब, 239 सिंचाई जलाशय, 1265 निजी तालाब और 685 मनरेगा तालाबों में करीब 20 हजार मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हो रहा है। यहां की मछली गोदिंया, नागपुर, नरसिंहपुर, मंडला और सिवनी में निर्यात हो रही हैं।