टीन के सहारे कुली हिल टैंक, साल भर पहले ढहा था 400 वर्गफीट हिस्सा

टीन के सहारे कुली हिल टैंक, साल भर पहले ढहा था 400 वर्गफीट हिस्सा

जबलपुर । 1960 में बनी कुली हिल टंकी शहर की सबसे बड़ी पानी की टंकी है। इसे बने 61 साल हो चुके हैं। इस टंकी की छत का हिस्सा पहले भी कई बार गिर चुका है और गत वर्ष 31 जुलाई को भी इसका 400 वर्गफीट हिस्सा टूटकर टंकी के अंदर गिरा था। तब यहां टंकी के गिरे हिस्से में टीन रखकर ही काम चलाया जा रहा है। नगर निगम साल भर में भी इसकी मरम्मत नहीं करवा पाया। पूर्व विधानसभा क्षेत्र के 9 वार्डों की प्यास इस टंकी से बुझाई जाती है। कुछ सालों से इसे पूरा नहीं भरा जाता जिसकी वजह टंकी का जर्जर होना है। नगर निगम को इस टंकी का पूरा लेंटर अलग कर नया डालना होगा या फिर पूरी टंकी ही डिस्मेंटल कर नई टंकी बनानी होगी। बरसों से ननि इसी पशोपेश में है कि क्या किया जाए। 1960 में बनी इस टंकी में उतना पानी भरता है जितना 3 उच्चस्तरीय टंकियों में भरा जाता है। इसके बाद भी इस टैंक की नगर निगम द्वारा उपेक्षा की जाती है।

अमृत योजना से होना थी टैंक की मरम्मत

उस वक्त जल विभाग के अधिकारियों ने बताया था कि टैंक की मरम्मत अमृत योजना के तहत की जाएगी। अमृत योजना का पूरा पैसा नई 16 टंकियां तथा इसका इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने में खर्च कर दिया गया है अब इसकी मरम्मत एक बार फिर अधर में है।

10 हजार वर्गफीट में बना है कुली हिल टैंक

पहाड़ी के ऊपर करीब 10 हजार वर्गफीट जगह में यह टैंक बना हुआ है। इसमें 3 बड़ी टंकियों के बराबर पानी बनता है। इसकी कुल क्षमता 15 लाख गैलन की है। करीब 9 वार्डों को इससे पानी मिलता है। वर्ष 1960 से लगातार इस टैंक को भरा जाता रहा है। पहले इसे केवल रांझी फिल्टर प्लांट से ही भरा जाता था लेकिन बाद में इसे नर्मदा पेयजल लाइन से भी भरा जाता है।

मरम्मत के लिए केवल योजनाएं बनीं

इस टैंक की मरम्मत के लिए पहले एडीबी योजना से मरम्मत कराने की बात हुई और योजना भी तैयार हो गई पर काम नहीं हुआ। फिर जेनएनएनयूआरएम योजना से मरम्मत का प्रयास हुआ लेकिन तब भी काम नहीं हो पाया। फिर अमृत योजना से मरम्मत का काम करवाने की बात कही गई मगर अब तो इसका फंड भी समाप्त हो चुका है। लिहाजा कुली हिल टैंक की मरम्मत अधर में लटक गई है। 2 से 3 बार इसके लेंटर के छोटे-छोटे टुकड़ों के गिरने से इसकी सुरक्षा भी अब खतरे में है।