विद्युतिकरण में करोड़ों की धांधली, 2 साल से जांच अधूरी

विद्युतिकरण में करोड़ों की धांधली, 2 साल से जांच अधूरी

भोपाल। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतिकरण योजना में करोड़ों रुपए की गड़बड़ी का मामला सामने आने के दो साल बाद भी दोषी अफसरों पर जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। जिन अफसरों की विभागीय जांच प्रारंभ की गई है उनका अंतिम निर्णय वरिष्ठ स्तर पर होना है। उधर, कांग्रेस विधायक सुरेश राजे इस पूरे मामले को विधानसभा में लाने की बात कह रहे हैं। मामला मुरैना वृत्त का है। ग्रामीण विद्युतिकरण योजना (12वीं प्लान) अन्तर्गत विद्युतिकरण करने का काम बजाज इलेक्ट्रिकल्स मुंबई को वर्ष 2019 में दिया गया था। आरोप है कि कंपनी ने समय पर न ट्रांसफॉर्मर लगाए और न खंबे खड़े किए, जिससे क्षेत्र में बिजली की समस्या बनी रही। इसको लेकर जांच समिति गठित की गई। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट 27 जुलाई 2022 को मुख्य महाप्रबंधक ग्वालियर क्षेत्र को सौंप दिया। जांच रिपोर्ट के अनुसार पाई गई कमियों के विरुद्ध आकलित राशि 4 करोड़ 76 लाख 27 हजार 261 निकली। यह राशि कंपनी के बिलों में समायोजित की गई। इसके पहले भी 11 सितंबर 2019 को 6 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने 20 मार्च 2020 को सौंपी रिपोर्ट में बताया कि ग्रामों, मजरों, टोलों में किए गए कार्यों में बजाज इलेक्ट्रिकल्स मुंबई ने बहुत कमियां की हैं।

55 लाख का आर्थिक नुकसान होने की रिपोर्ट

जांच कमेटी ने अमानक, गुणवत्ताहीन एवं अपूर्ण कार्यों की जानकारी देते हुए वित्तीय नुकसान होने की रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट में करीब 55.06 लाख रुपए की वित्तीय हानि होना पाया गया और इसके लिए तत्कालीन महाप्रबंधक एवं प्रोजेक्ट मैनेजर मुरैना और नोडल अधिकारी अम्बाह संभाग को जिम्मेदार माना गया।

इनके खिलाफ बैठाई विभागीय जांच

विनोद कटारे तत्कालीन महाप्रबंधक एवं प्रोजेक्ट मैनेजर मुरैना को आरोप पत्र और गगन देव तत्कालीन नोडल अधिकारी एवं उप महाप्रबंधक अम्बाह संभाग को कारण बताओ नोटिस दिया गया। 11 नवम्बर 2021 के बाद से अबतक विभागीय जांच ही चल रही है।