कच्चा तेल 90 डॉलर से नीचे, पर कंपनियों को डीजल पर प्रति लीटर 8 रुपए का घाटा

कच्चा तेल 90 डॉलर से नीचे, पर कंपनियों को डीजल पर प्रति लीटर 8 रुपए का घाटा

नई दिल्ली। रूस पर यूक्रेन के हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत 139 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। 2008 के बाद यह उच्चतम स्तर था, लेकिन पिछले हते कीमत गिरकर 90 डॉलर से नीचे आ गई। कमजोर मांग और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से कीमत गिरी है, लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत में5 माह से कोई बदलाव नहीं है। सूत्रों के अनुसार, ऑयल कंपनियों को डीजल पर प्रति लीटर आठ रुपए का नुकसान हो रहा है। सऊदी अरब भारत का दूसरा बड़ा ऑयल सप्लायर: रूस- यूक्रेन युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों ने रूस से तेल लेना बंद कर दिया। इससे भारतीय कंपनियों को रूस से सस्ता तेल मिला। इस तरह रूस भारत का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर बन गया। हालांकि जून के बाद रूस से तेल के आयात में गिरावट है। तीन माह के बाद अगस्त में सऊदी अरब भारत का दूसरा सबसे बड़ा ऑयल सप्लायर बन गया।

कमजोर मांग और अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना कारण

पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में 5 महीने से बदलाव नहीं

आयात पर 35,000 करोड़ रु. का फायदा

अप्रैल से लेकर अगस्त तक भारत के कुल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी करीब 16% थी, जो एक साल पहले 0.5 % थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस से सस्ता तेल खरीदने से भारत को 35000 करोड़ रुपए का फायदा हुआ।

जून तिमाही में कंपनियों को 18,480 करोड़ का घाटा

जून तिमाही में तीन सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के कुल 18,480 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। कच्चे तेल की कीमत में तेजी आने से उन्हें डीजल पर प्रति लीटर 20-25 रुपए और पेट्रोल पर 14 से 18 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था। कच्चे तेल की कीमत में गिरावट के बाद अब यह नुकसान काफी हद तक कम हो चुका है। लेकिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने इसका फायदा ग्राहकों को नहीं दिया। जानकारों का कहना है कि जब तेल की कीमत में उछाल आई थी तो सरकार ने महंगाई को काबू में रखने के लिए कंपनियों को पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाने दी। पहले कंपनियों को नुकसान की भरपाई करने का मौका दिया।

कितना है घाटा

सोमवार को कच्चे तेल की कीमत में आई गिरावट के बाद भी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को डीजल पर प्रति लीटर आठ रुपए का नुकसान है। जून तिमाही में यह नुकसान 15 रुपए और मौजूदा तिमाही में पिछले हते तक 13 रुपए था। पेट्रोल के मुकाबले डीजल बनाना महंगा है, लेकिन भारतीय बाजार में डीजल के मुकाबले पेट्रोल महंगा पड़ता है।

पेट्रोल पर अब 6.5 रुपए का फायदा

पेट्रोल पर अब ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को प्रति लीटर 6.5 रुपए का फायदा हो रहा है। पहली तिमाही में उन्हें 11 रुपए और पिछले हते तीन रुपए प्रति लीटर का घाटा हो रहा था। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमत 88 डॉलर प्रति बैरल या उससे नीचे बनी रहती है तो ग्राहकों को कुछ राहत मिलेगी।