आइसब्यूरियल तकनीक से जम जाएगा शव, बचेगी सिर्फ धूल

आइसब्यूरियल तकनीक से जम जाएगा शव, बचेगी सिर्फ धूल

बीजिंग। चीन में कोविड की वजह से भारी संख्या में लोगों की मौत होने की आशंका जताई गई है और आने वाले वक्त में जब एक-एक दिन में हजारों लोगों की मौत होगी, तो फिर उनके अंतिम संस्कार में काफी वक्त लगेगा और शव दाह सेंटर्स पर भारी भीड़ होगी। इन सबके बीच चीन ने नई टेक्नोलॉजी को पेश किया है, जिसे आइसब्यूरियल तकनीक कहा जाता है। इस तकनीक का परीक्षण चीन के वुहान शहर में किया जा रहा है। यह जानकारी चीन पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट जर्नलिस्ट जेनिफर जेंग ने दी है। संभव है इस प्रक्रिया का पहले भी इस्तेमाल किया हो माना जा रहा है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी इस टेक्नोलॉजी के सहारे आने वाले वक्त में लोगों की मौत पर बुरी तरह से झूठ बोलने वाली है। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की क्रूरता को अगर देखना हो, तो इस नई टेक्नोलॉजी के बारे में जरूर जानना चाहिए। चीन में इससे पहले इस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को लेकर मार्च 2022 में भी एक रिपोर्ट आई थी। जेनिफर जेंग ने आशंका जताई है कि शायद चीन में इस टेक्नोलॉजी से पहले भी शवों के अंतिम संस्कार किए गए हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि शायद इसका इस्तेमाल पहले दौर के प्रकोप में दौरा किया गया होगा।

क्या है आइसब्यूरियल टेक्नोलॉजी

???? इस तरीके में शवों को फौरन लिक्विड नाइट्रोजन में माइनस 196 डिग्री पर जमाया जा सकता है और फिर उसे पाउडर के रूप में बदल दिया जाता है। ???? ये प्रक्रिया काफी तेज होती है और श्मशान में एक शव के संस्कार में जितना वक्त लगता है, उससे काफी ज्यादा तेजी से ये प्रक्रिया संपन्न होती है। लिहाजा, इस प्रक्रिया से शव के अंतिम संस्कार में काफी कम वक्त लगेगा।

स्वीडिश कंपनी भी कर चुकी है इसका प्रयोग

यह कोई पहली बार नहीं है, जब किसी मृत शरीर का अंतिम संस्कार करने के लिए आइसब्यूरियल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इससे पहले 2016 में स्वीडिश व आयरिश कंपनी ने दफनाने के नए रूपों का इजाद करने का दावा किया था और आइसब्यूरियल टेक्नोलॉजी को पेश किया था, जिसमें मृत शरीर को जमाने और गलाने के लिए लिक्विड नाइट्रोजन का उपयोग किया जाता है।

लिक्विड नाइट्रोजन से जमा देता है शव को

इस प्रक्रिया एक कस्टम-निर्मित मशीन में होती है। मशीन शव के अंदर मौजूद पानी को पूरी तरह सुखा देता है। फिर लिक्विड नाइट्रोजन से शव जम जाता है और कुछ मिनटों में डिवाइस के अंदर सिर्फ धूल बचती है। स्वीडन के सुजैन वाईघ-मसाक के नेतृत्व में प्रोमेसन नाम की इस विधि को विकसित किया था, जिसमें इंसानी शरीर को कार्बनिक पदार्थ में बदल दिया जाता है, जो एक साल में मिट्टी में परिवर्तित हो जाता है।

चीन में एक हμते में भर्ती हुए 63,307 मरीज: WHO

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की के मुताबिक, चीन में एक हμते में कोविड-19 के 63,307 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए हैं जो महामारी की शुरूआत से सबसे अधिक है। चीन में इस बीमारी से 15 जनवरी तक अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों की संख्या पिछले सप्ताह की तुलना में 70 प्रतिशत बढ़ गई।