अपना नेचर कोशंट विकसित करें, आदतों मे बदलाव लाएं ताकि धरती को हरा-भरा रखने में बन सकें भागीदार

अपना नेचर कोशंट विकसित करें, आदतों मे बदलाव लाएं ताकि धरती को हरा-भरा रखने में बन सकें भागीदार

I AM BHOPAL ।  हर साल 28 जुलाई को विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस मनाया जाता है। इसके माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता पैदा की जाती है। इसके माध्यम से हमारी मौजूदा और भावी पीढ़ियों के धरती पर सुरक्षित जीवन की उम्मीद की जाती है। महात्मा गांधी ने कहा है कि प्रकृति मनुष्य की जरूरतों को तो पूरा कर सकती है लेकिन इंसान के लालच को नहीं। हम अपने इमोशनल कोशंट, इंटेलिजेंस कोशंट और अब स्प्रिचुअल कोशंट की बात करने लगे हैं लेकिन इन सभी बातों का एहसास करने के लिए सबसे जरूरी होगा, नेचर कोशंट। जी हां, यह सुनने में नई बात लगे लेकिन एनवायर्नमेंटलिस्ट इसे साइंटिफिकली कैलकुलेट करते हैं। आसान ढंग से हम यह समझ सकते हैं कि हर व्यक्ति अपने स्तर पर किस तरह से प्रकृति को संरक्षित रखने के लिए प्रयास कर रहा है यह उसका नेचर कोशंट हो सकता है। भोपाल में अंश हैप्पीनेस सोसायटी, एकता परिषद, अनंत मंडी और गो रुर्बन इस बेहतर पहल में शामिल हैं।

 इन 10 तरीकों से प्रकृति को रखें सुरक्षित 

ऐसे चीजों को खरीदें जिसका दोबारा किया जा सके और वे प्रकृति में खुद डिजॉल्व हो जाएं।

पौधे लगाएं ताकि ईको-सिस्टम बेहतर रहे।

कपड़े या कागज के थैले का इस्तेमाल करें।

एक बार इस्तेमाल हो चुके पानी को दोबारा सफाई के काम में यूज करें घर के आंगन या छत में ऑर्गनिक  खाद के साथ सब्जियां लगाएं।

रेन वॉटर हार्वेस्टिंग कराएं, ताकि ग्राउंड वाटर लेवल मेनटेन रहे।

ग्रीन वेस्ट फेंकने की बजाय कम्पोस्टिंग करें।

जब आपका काम हो जाए तो बिजली से चलने वाले उपकरणों को बंद कर दें।

बेहतर यह होगा कि ऐसी बैटरियों का इस्तेमाल करें, जो दोबारा रिचार्ज हो सकें।

यदि संभव हो सकें तो सेंसर वाले टैब और लाइट्स लगवाएं ताकि उर्जा की बचत हो।

आसपास के काम साइकिल से निपटाएं, ताकि वाहन का इस्तेमाल कम से कम हो।

 गुड रीड्स ऑन एनवायर्नमेंट 

कुछ किताबें जो कि प्रकृति और जैव विविधता को समझने में मददगार है। यह पीडीएफ बुक्स इंटरनेट में नि:शुल्क उपलब्ध हैं। लॉकडाउन में और विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के मौके पर इसमें से कुछ किताबें पढ़कर नेचर कोशंट की तरफ बढ़ सकते हैं।

आज भी खरे हैं तालाब: अनुपम मिश्र

हरा भरा रहे पृथ्वी का पर्यावरण: नीलम कुलश्रेष्ठ

पुराणों में पर्यावरण: मनोज सिंह

पर्यावरण और हम: डॉ विजय अग्रवाल

बदलता पर्यावरण: प्रेमचंद श्रीवास्तव

पर्यावरण और जैव प्रौद्योगिकी: डॉ. प्रवीण चंद्र त्रिवेदी

भारत में आर्थिक पर्यवारण: ओपी शर्मा

प्रदूषणरोधी वृक्ष : विष्णुदत्त शर्मा

 पहली स्वैप सेल भोपाल में की, जैविक उत्पादों को दे रहे ‘अनंत मंडी’ से बढ़ावा 

भोपाल की जैविक किसान मंडी,अनंत मंडी की पहल दो साल पहले कई गई थी। इसका उद्देश्य शहर में स्वस्थ और सस्टेनेबल जीवनशैली की जागरूकता को बढ़ाना। गांधी भवन में यह मंडी लॉकडाउन के पहले तक आयोजित हो रही थी। रासायन मुक्त खेती करने वाले लगभग 30 किसान जुड़े। भोपाल में पहली बार स्वैप सेल लगाई, जिसमें नई चीजें खरीदने के बजाय एक्सचेंज करने की संस्कृति को बढ़ावा दिया गया। ऐसी जगह जहां आप किताबों, कपड़ों आदि चीजों का आदान- प्रदान कर सकते हैं। भोपाल में यह सेल गांधी भवन में आयोजित होती रही है। - पीयूली घोष,को-फाउंडर, अनंत मंडी

 प्रकृति से जुड़ाव कराने कम्युनिटी में लेकर युवाओं को कराते हैं अनुभव 

अर्बन यूथ को गांवों की विजिट कराते हैं ताकि वे यह जान समझ सकें कि गांवों में रहने वाले कितने कम संसाधनों के साथ स्वस्थ जीवन यापन करते हैं। हम प्रकृति का शोषण करते हैं और वे संरक्षण। सिर्फ यह बातें बोलने से काम नहीं होगा इसलिए हम उन्हें एक्सपीरियंस कराने देश के अलग-अलग राज्यों की कम्युनिटीज में लेकर जाते हैं। कोरोना से पहले गुजरात की मालधारी कम्युनिटी के बीच यूथ को लेकर गए। जब वे अनुभव करते हैं तो उनके भीतर बिहवेरियल चेंजेंस आते हैं और जिससे वे कम से कम रिसोर्सेस के साथ जीने की कोशिश करते हैं। - मोहसिन, वालंटियर, गो रूर्बन