दिव्यांग गीता 10 हजार मूक बधिरों को सिखा रहीं नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे

दिव्यांग गीता 10 हजार मूक बधिरों को सिखा रहीं नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे

भोपाल। महाराष्ट्र के परभणी की दिव्यांग (मूक-बधिर) राधा 8 वर्ष की उम्र में पाकिस्तान पहुंच गई थी। वह करीब 20 साल बाद अपने परिवार तक पहुंच सकी। अब गीता जब परिवार तक पहुंची तो राधा नाम की पहचान वापस मिली। गीता ने मंगलवार को भोपाल पहुंचकर आभार जताया। गीता महाराष्ट्र के 10 हजार मूक-बधिर बच्चों को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की प्रार्थना सिखा रही है। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने हाल ही में औरंगाबाद में ज्ञानेंद्र और मोनिका पुरोहित को नागपुर में इन सभी बच्चों को एकत्र कर भव्य प्रार्थना कराने की अनुमति दे दी है। आनंद सर्विस सोसाइटी के ज्ञानेंद्र पुरोहित ने बताया कि गीता बच्चों को पढ़ाना चाहती है।

तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की पहल से आर्इं भारत

जीआरपी हेडक्वार्टर में मंगलवार को आईजी रेल महेंद्र सिंह सिकरवार, एसआरपी हितेष चौधरी ने गीता को परिवार तक पहुंचाने के प्रयासों के बारे में जानकारी दी। वर्ष 2000 के आसपास जिंतुर, जिला परभणी की रहने वाली 8 साल की मूक- बधिर गलती से परभणी रेलवे स्टेशन से बैठकर सचखंड एक्सप्रेस में अमृतसर चली गई। वहां से वापस जाने वाली ट्रेन समझकर वह समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में बैठकर पाकिस्तान चली गई। वहां लाहौर में पाक रेंजर्स ने उसको एक अनाथ बच्चों की संस्था में भर्ती करा दिया था। एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उसकी जानकारी वायरल हुई। भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ज्ञानेंद्र-मोनिका पुरोहित से गीता को भारत वापसी एवं इनके परिवार को ढंूढने और पुनर्वास के लिए चर्चा की। इसके बाद गीता को वर्ष 2015 में भारत लाया गया।

ऐसे पहुंची अपने घर

???? 2020 में गीता की इच्छा के अनुसार कलेक्टर इंदौर के आदेश से आनंद सर्विस सोसायटी में रखा गया।

???? ज्ञानेंद्र-मोनिका पुरोहित ने पुलिस, जीआरपी के साथ देश के दक्षिणी क्षेत्र में परिवार की खोज शुरू की।

???? गीता ने संकेतों में बताया था कि उसके घर के पास गन्ने का खेत है, रेलवे स्टेशन के पास मैटरनिटी होम है। वह पूजा करती थी तो अंदाज लगाया गया कि परिवार पूजा कार्य से संबंधित होगा।

???? 2021 में महाराष्ट्र से एक फोन आने पर गीता के परिजन होने का दावा किया। गीता की मां ने बताया कि बेटी के पेट पर जलने का निशान है। यह जानकारी और अन्य बातें भी सही थीं।

???? अब वह पहल फाउंडेशन मूक-बधिर संस्था में अशोक कुलकर्णी व अनिकेत शेलगांवकर की संस्था में पढ़ रही है।