फेसबुक और ट्विटर का आरोप रूस फेक अकाउंट का नेटवर्क बनाकर अमेरिकी चुनाव को प्रभावित कर रहा

फेसबुक और ट्विटर का आरोप रूस फेक अकाउंट का नेटवर्क बनाकर अमेरिकी चुनाव को प्रभावित कर रहा

वॉशिंगटन। 2016 के बाद 2020 में भी रूस अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। फेसबुक और ट्विटर ने मंगलवार को यह जानकारी दी। रूस ने फेक अकाउंट्स और वेबसाइट्स का एक नेटवर्क बनाया है। ये लेफ्ट-विंग (वामपंथी) समर्थक न्यूज वेबसाइट की तरह दिखते हैं।
रूस से गलत सूचनाएं फैलाने का एक कैम्पेन चलाया जा रहा है। इस कैम्पेन को इंटरनेट रिसर्च एजेंसी के रूप में जाना जाता है। यह एजेंसी डेमोक्रेटिक पार्टी से वोटरों को दूर करने की कोशिश कर रही है। यही काम इसने चार साल पहले भी किया था। अफसरों के मुताबिक- फेसबुक और ट्विट पर इसकी एक्टिविटी अचानक बढ़ी है, इसका आसानी से पता लगाया जा सकता है।
इंटरनेट रिसर्च एजेंसी 2016 में काफी एक्टिव थी। फेक नेटवर्क और साइट की मौजूदा समय तक उतने लोगों तक पहुंच नहीं है, जितनी 2016 के चुनावों में थी। रूस ने इन वेबसाइटों के लिए लिखने के लिए अमेरिकी नागरिकों को ही रखा है। एक रूसी साइट का नाम पीसडाटा है। यह किसी न्यूज आॅर्गनाइजेशन की तरह दिखता है। इस वेबसाइट पर एडिटर्स के नाम और फोटो भी हैं, लेकिन ये सब फर्जी है। फोटो कंप्यूटर के जरिए बनाई गई हैं।

रूसी फेक वेबसाइट्स विज्ञापन निकालकर अमेरिकी लेखकों से आर्टिकल लिखवा रही है। नाम न छापने की शर्त पर एक लेखक ने बताया कि उसने भी रूसी वेबसाइट पीसडाटा के लिए लिखा है। उसने विज्ञापन में देखा था। पहले लेख में उसने डेमोक्रटिक पार्टी पर सवाल उठाए थे। उसका आर्टिकल ज्यों का त्यों चला था और 75 डॉलर (साढ़े पांच हजार रुपए) मिले थे।