असली शिकारियों को बचाने नकली गए जेल

असली शिकारियों को बचाने नकली गए जेल

भोपाल। वन्य प्राणियों का शिकार करने वाले असली शिकारियों को बचाने के लिए लाखों की डील के बदले नकली शिकारी जेल चले गए। इतना ही नहीं, असली शिकारी जिस बोलेरो को शिकार सहित छोड़कर भाग गए थे, उस बोलेरो को नकली शिकारियों के नाम पर ट्रांसफर करवाने की चाल भी चली गई। हालांकि असली और नकली शिकारियों की मोबाइल लोकेशन और टोल नाके के सीसीटीवी फुटेज से भांडा फूट गया। अब असली शिकारियों को दुबई भागने से रोकने के लिए लुकआउट नोटिस जारी करने की तैयारी है। यह मामला 7 अगस्त का रायसेन जिले की गढ़ी रेंज का है। दरअसल, वन विभाग को शिकारियों की सूचना मिली थी। इसके बाद टीम ने तड़के बम्होरी रोड पर राजघाटी इलाके में घेराबंदी की। हालांकि शिकारी देवनगर पुलिस का बेरीकेड्स तोड़कर फार्च्यूनर और बोलेरो सहित भाग निकले। बाद में नकतरा में पुलिस ने रोड ब्लॉक किया, लेकिन शिकारी उससे पहले सांचेत गांव की ओर मुड़ गए। मांगलिया गांव में फंसने के बाद शिकारी बोलेरो छोड़कर जंगल में भाग गए। वन अमले ने बोलेरो जब्त कर तलाशी ली तो उसमें सागौन की लकड़ी और 72 किलो नील गाय का ताजा मांस पन्नी में पैक मिला। बोलेरो (एमपी 04 केजी 5850) भोपाल निवासी फारुक शेख की निकली। इसमें एक अन्य गाड़ी की रजिस्ट्रेशन बुक और इलेक्ट्रॉनिक चाबी मिली, जो कि फार्च्यूनर की बताई जाती हैं। विभाग ने फारुक शेख के नाम से नोटिस जारी किया है।

नकबजन बना शिकारी

जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। विभाग ने फारुक को नोटिस जारी किया था, लेकिन उसकी जगह भोपाल के ऐशबाग निवासी हिस्ट्रीशीटर मजहर टोपी और उसका कथित भतीजा आरिस पहुंचे और बोलेरो खरीदने संबंधी कागज पेश किए। दोनों का दावा था कि उन्होंने यह गाड़ी खरीदी है। हालांकि गाड़ी उनके नाम पर नहीं थी। दोनों की मोबाइल लोकेशन भी भोपाल में ही थी। फिर भी दोनों को गिरतार किया गया।

जल्द कार्रवाई होगी

नकली शिकारियों के जेल में होने की जांच हो रही है। जल्द ही कार्रवाई होगी। शिकारी पुलिस बेरीकेड्स तोड़कर भागे थे। फॉरेस्ट से भी क्रॉस चेक करवाएंगे। दीपिका सूरी, आईजी, होशंगाबाद रेंज

सीधी बात

अजय पांडे, डीएफओ, जिला रायसेन

असली के बजाय नकली शिकारी क्यों और कैसे जेल पहुंच गए? - इस साजिश का पता चल चुका है और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

क्या नकली शिकारियों के नाम पर बोलेरो ट्रांसफर हो गई है? - कोशिश तो की गई थी, लेकिन ट्रांसफर नहीं हो सकी। अब जिसके नाम पर गाड़ी है उसकी भी जल्द गिरतारी होगी।

जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है? -जेल में बंद नकली और असली शिकारियों की मोबाइल लोकेशन, बोलेरो और फार्च्यूनर गाड़ियों की टोल नाके से निकासी के सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य सबूत इकट्ठे किए गए हैं।