सरकारी धान खरीदी में विलंब का किसानों ने भुगता खामियाजा, खलिहान में भीग गई

सरकारी धान खरीदी में विलंब का किसानों ने भुगता खामियाजा, खलिहान में भीग गई

जबलपुर। सरकारी धान खरीदी में विलंब होने का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा है। जिले में 100 फीसदी धान की कटाई हो चुकी है। ऐसे में खलिहानों में रखी धान को किसान पानी से बचाने में असफल रहे और कई टन धान बारिश में भीग गई है। हालांकि मंडी में प्राईवेट धान की खरीदी सुरक्षित है। इससे किसानों ने राहत महसूस की है। उल्लेखनीय है कि शासन ने 1 दिसंबर से धान की खरीदी घोषित की है। इसलिए कटाई के बाद धान को खलिहान में रहने दिया। कुछ किसानों ने घरों में धान सुरक्षित रख ली लेकिन कई टन धान भीग गई और इसके सरकारी खरीदी पर खतरा मंडरा रहा है। समर्थन मूल्य पर होने वाली धान खरीदी में हो रही देरी से किसान भड़क रहा है। गेंहू की बोवनी के लिए रुपयों की जरूरत के चलते किसान अढतियों को नगद में धान बेच रहा है। सरकार द्वारा खरीदी एक माह विलंब से करने के कारण किसानों के सामने धान को सहेजकर रखने की समस्या हो रही है।

रबी की तैयारी प्रभावित

किसान अशोक पटेल और रामेश्वर पटेल ने बताया कि अब तक धान खरीदी की डेट डिक्लेयर नहीं होने से उन्हें चिंता सता रही है की, खुले में पड़ा धान कहीं मौसम की वजह से खराब ना हो जाए। दूसरी तरफ कुछ किसान ऐसे भी है जिन्होंने कर्ज लेकर खेती की है, लिहाजा समय पर फसल नहीं बिकने से वह साहूकारों को अपना भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। वहीं कुछ किसानों का कहना है कि जब तक धान की फसल उठ नहीं जाती तब तक वह रबी सीजन की बुवाई भी नहीं कर पा रहे हैं।

आढ़तियों को बेच रहे धान

इस बार दीपावली एवं छोटी दिवाली मनाने के बाद धान नहीं बिकने के कारण किसानों के हाथ खाली रहे। त्योहार के साथ गेंहू की बोवाई के लिए कुछ किसान जरूरत के हिसाब से अढतियों को धान बेचकर नगद रकम ले रहे हैं। खर्च सहित बोवाई के लिए किसान या तो कर्ज लेकर काम करे या फिर धान की फसल प्राइवेट में बेच दे। अढतिया भी किसान की मजबूरी का फायदा उठाते हुए 150 से 200 रुपए कम में क्विंटल के हिसाब से धान खरीद रहा है।

दिसंबर से सरकारी खरीदी के लिए किसानों को मैसेज भेज दिए गए हैं। मंडी में जो किसान धान लाए थे वे प्राइवेट में विक्रय कर रहे हैं। हालांकि शेड 1 में धान सुरक्षित रखी गई है। -आरके सैयाम, मंडी सचिव