बाजार में मिलेट्स के रेडी टू यूज पैक कोदो कुटकी के डोसे खीर से मिलेगा फाइबर और अमीनो एसिड

बाजार में मिलेट्स के रेडी टू यूज पैक कोदो कुटकी के डोसे खीर से मिलेगा फाइबर और अमीनो एसिड

 खाना हमारा कोदो कुटकी, क्या जाने रे लड्डू पेड़े भईया हम तो आदिवासी..., यह कविता बचपन में पढ़ा करते थे, लेकिन अब इसकी अहमियत समझ आ रही है। साल 2023 को संयुक्त राष्ट्र की ओर से इंटरनेशन ईयर आॅफ मिलेट्स(मोटा अनाज)घोषित किया गया है, जिसमें पॉजिटिव मिलेट कंगनी, कुटकी, सामा, सनवा, कोदो और छोटी कंगनी, हरी कंगनी शामिल है। वहीं न्यूट्रल मिलेट में बाजारा, रागी और चेना (प्रोसो)ज्वार, मक्का आते हैं और बड़ी तेजी से अब डायटीशियंस व न्यूट्रीशनिस्ट इसके बारे में अवेयरनेस प्रोग्राम कर रहे हैं ताकि इसका स्वाद लोगों की जुबान पर जमने लगे। यूएन ने साल 2030 तक के लिए सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल में लक्ष्य निर्धारित किए हैं जिसमें कुपोषण, भुखमरी को खत्म करने से लेकर क्लाइमेंट चेंज पर बात है जिसमें यह धान्य अहम भूमिका निभा सकते हैं। इससे पुलाव, खीर, लड्डू, कुकीज व दक्षिण भारतीय व्यजंन बन रहे हैं।

कोदो मिलेट वेजी चीला

बाजार में कोदो अनाज मिलता है। कोदो अनाज को तीन से चार बार धो लें और फिर चार घंटे के लिए भीगोकर रख दें। अब इसे अदरक, नमक और हरी मिर्च के साथ ग्राइंड कर लें। बैटर को कटोरे में निकाल लें और सभी पसंद की सब्जी मिला दें। तवा गर्म करें और बैटर के चीले के लिए फैलाएं, अब दोनों तरफ से सेकें और नारियल की चटनी से खाएं। यह स्वाद धीरे-धीरे जुबान पर डेवलप होने लगेगा।

बीमारियों से लड़ने में मदद

दुनिया में मुख्य भोजन के रूप में चावल, गेहूं और एनिमल बेस्ड डाइट का उपयोग होता है। भोजन में फाइबर की मात्रा बहतु कम है इसका मुख्य कारण है अधिकांश भोजन रिफाइंड किया हुआ या प्रोसेस्ड है। डॉ. अलका दुबे कहती हैं, पश्चिमीकरण होने के बाद से हम गेंहू व चावल पर निर्भर हुए वरना हम मोटा अनाज खाने वाले लोग थे, लेकिन, देखते ही देखते हमने मोटे अनाज को खुद से दूर कर दिया। ये जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं।

मैंने 40 से अधिक तरह की रेसिपी तैयार की हैं

कोदो के सेवन से कैंसर सेल्स का फैलना रूकता है ऐसे रिसर्च पेपर भी आए हैं। मैंने ऐसे रेडी-टू-यूज मिलेट्स पैक बनाए हैं जिसमें 40 से अधिक रेसिपी हैं जिन्हें रेगुलर डाइट में शामिल कर सकते हैं। मैंने कई वर्कशॉप व हर्बल फेयर में कुटकी की खीर बनाकर लेकर गए जिसे बहुत पसंद किया गया। मैं तीन साल से इस पर काम कर रही हूं। मोटे अनाज में उच्च प्रोटीन स्तर और अधिक संतुलित अमीनो एसिड प्रोफाइल के कारण पौष्टिक रूप से गेहूं और चावल से बेहतर है। यह बेड कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखने और हार्ट की रक्षा करने में मदद करता है। इंसुलिन के स्तर को संतुलित व ब्लड प्रेशर घटाता है। मोटे अनाज में पर्याप्त फाइबर होने के कारण यह पाचन सुधारता है। पूजा कोहली, डायटीशियन व रिसर्चर

मोटे अनाज से बना सकते हैं यह रेसिपी

मिलेट्स लंच के मेन्यू में रागी का सूप, रागी के पकोड़े, कोदो के भजिये, बाजरा और गुड़ के पुये, कुटकी के फरे, रागी, कुटकी के चीले, बाजरे की कढ़ी, लाल भाजी, जिमी कांदा, कोदो का वेज पुलाव, ज्वार, बाजरा, रागी के रोटी और पराठे तैयार करना सीख सकते हैं। इसके साथ ही रागी, कुटकी का कप केक, रागी का हलवा, कुटकी की खीर और कोदो की ड्राई फ्रूट्स खीर बना सकते हैं। अगर आप चाहें तो गेहूं के आटे में रागी, ज्वार, कालाचना , बाजारा, जौ आटा अलग-अलग मात्रा में मिला सकते हैं या एक से दो अनाज भी मिला सकते हैं।