फ्रांस और स्पेन आर्थिक मंदी की चपेट में

फ्रांस और स्पेन आर्थिक मंदी की चपेट में

पेरिस। कोरोना वायरस महामारी के कारण फ्रांस की अर्थव्यवस्था में रिकॉर्ड गिरावट (13.8%) दर्ज की गई है। अमरीका और जर्मनी के बाद अब फ्रांस की अर्थव्यवस्था भारी गिरावट का शिकार हुई है। फ्रांस में निर्यात, निवेश और उपभोक्ताओं का खर्च तेजी से गिरा है। ये आंकड़े जारी करनी वाली एजेंसी का कहना है कि अप्रैल का महीना फ्रांस के लिए सबसे बुरा रहा। मई और जून में पाबंदियों में ढील दिए जाने के बाद थोड़ा सुधार आया था, हालांकि आर्थिक गतिविधियां औसत से नीचे ही थीं। इन आंकड़ों से ये भी पता चलता है कि पिछली तीन तिमाहियों से फ्रांस में आर्थिक मंदी है।

स्पेन की जीडीपी में 20 प्रतिशत की गिरावट

फ्रांस के अलावा स्पेन भी कोरोना वायरस महामारी के कारण आर्थिक मंदी की चपेट में आ गया है। स्पेन की जीडीपी में साल की दूसरी तिमाही में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। पहली तिमाही में भी पांच फीसदी से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई थी। इस मंदी की वजह से पिछले छह वर्षों में हुई वृद्धि बेअसर हो गई है। गिरावट के ये आंकड़े पहले लगाए गए अनुमानों से भी ज्यादा बुरे हैं।

अरामको को पछाड़ एपल बनी दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी

कैलिफोर्निया। एपल के शेयर में शुक्रवार को 7.1 फीसद का रिकॉर्ड उछाल देखा गया। कंपनी के तिमाही नतीजों में शानदार प्रदर्शन के बाद शेयर में उछाल आया। कोरोना वायरस की महामारी के कारण दुनिया भर में तेल की मांग में भारी गिरावट आई है और इसका असर सऊदी की तेल कंपनी अरामको पर भी पड़ा है। इस उछाल से एपल ने सऊदी अरब की कंपनी आरामको को पछाड़ दिया और खुद दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बन गई है। शुक्रवार को बाजार के खुलते ही एपल कंपनी के शेयर की की मत 412 अमरीकी डॉलर हो गई। अगर उसी रेट पर बाजार बंद होता है तो ऐपल कंपनी का बाजार भाव 1.786 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगा। शुक्रवार दिन भर बाजार में ऐपल और आरामको एक दूसरे को आगे-पीछे करते रहे। तीसरी तिमाही में एपल कंपनी ने 11 फीसद का विकास देखा था और इसका राजस्व 59.7 अरब डॉलर था जबकि मुनाफा 11.25 अरब डॉलर था। महामारी के दौरान एपल कंपनी के सामानों को खासकर आई-पैड और मैक को लोगों ने ज्यादा खरीदा है।