फ्यूचर टेक्नोलॉजी पारिस्थितिकी तंत्र और समाज के अनुकूल होना चाहिए

फ्यूचर  टेक्नोलॉजी पारिस्थितिकी तंत्र और समाज के अनुकूल होना चाहिए

मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा μयूचर टेक्नोलॉजी विषय पर कार्यक्रम का आयोजन गुरुवार को किया गया। यह कार्यक्रम विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के लिए आत्मनिर्भर भारत की मुख्य थीम पर आधारित था। कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठरी द्वारा की गई। उन्होंने कहा कि ड्रोन टेक्नोलॉजी भविष्य के लिए रोजगार के अवसर लेकर आएगी, साथ ही आने वाले पांच वर्षों में ऐसे अनगिनत रोजगार के अवसर इन नई तकनीकों से सभी के लिए उपलब्ध होंगे। राष्ट्रीय पर्यावरण स्वास्थ्य शोध संस्थान के निदेशक डॉ. राज नारायण तिवारी ने भविष्य में ड्रोन टेक्नोलॉजी को एक अहम हिस्सा बताया। ग्रीन टेक्नोलॉजी एंव ग्रीन बिल्डिंग को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी देश की प्रगति के लिए तकनीक को विकसित करना आवश्यक है। आरजीपीवी के कुलपति डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि तकनीकी ऐसी हो जो देश में बनी हो, वही हमारे लिए लाभदायक है। μयूचर टेक्नोलॉजी का वर्गीकरण करते हुए बताया की यह पारिस्थितिकी तंत्र,समाज और सस्टेनेबिलिटी के अनुकूल होना चाहिए। परिषद के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एनके चौबे ने मेपकास्ट के द्वारा किए जा रहे है विभिन्न शोध एवं तकनीकी कार्यों की जानकारी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से दी।