जयपुर से निकले गहलोत के 6 मंत्री-5 विधायक 'लापता', नहीं पहुंचे जैसलमेर

जयपुर से निकले गहलोत के 6 मंत्री-5 विधायक 'लापता', नहीं पहुंचे जैसलमेर

जयपुर। राजस्थान में जारी सियासी संकट में शुक्रवार को नया मोड़ आ गया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने खेमे के विधायकों को जयपुर से निकालकर जैसलमेर शिफ्ट कर दिया। लेकिन खबर यह भी आ रही है कि इस शिफ्टिंग के दौरान गहलोत खेमे के 11 सदस्य लापता हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, गहलोत सरकार के 6 मंत्री और 5 विधायक अब तक जैसलमेर नहीं पहुंचे हैं। इसे लेकर बाजार में चचार्ओं को दौर शुरू हो गया है। सूत्रों के अनुसार, जयपुर से जैसलमेर नहीं पहुंचने वालों में परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा, खेल मंत्री चांदना, कृषि मंत्री लालचन्द कटारिया, चिकित्सा राज्यमंत्री सुभाष गर्ग, सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना, विधायक जगदीश जांगिड़, विधायक अमित चाचाण, विधायक परसराम मोरदिया, विधायक बाबूलाल बैरवा और विधायक बलवान पूनिया शामिल हैं, जो अबतक जैसलमेर नहीं पहुंचे हैं।

इससे पहले विधायकों की शिफ्टिंग को लेकर पूछ गए सवाल का जवाब देते हुए सीएम गहलोत ने कहा था कि हमारे विधायक जो कई दिनों से जयपुर में थे, उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था। उन पर और उनके घरवालों पर दबाव बनाया जा रहा था। बाहरी दबाव को दूर रखने के लिए उन्हें स्थानांतरित करने के बारे में सोचा और फिर स्थानांतरित कर दिया। सीएम ने कहा कि डेमोक्रेसी को बचाने के लिए हर किसी का कर्तव्य बनता है।

वहीं, जयपुर से जैसलमेर शिफ्टिंग के दौरान विधायकों की जो संख्या सामने आई है, उसने गहलोत गुट के अब तक के दावों की पोल ही खोल कर रख दी। पूर्व में गहलोत खेमे की ओर से कभी 109, कभी 104 तो कभी 101 से ज्यादा विधायकों के साथ होने की बात कही जाती थी। लेकिन विधायकों की शिफ्टिंग के दौरान नजारा दावों से उलट था। जैसलमेर शिफ्टिंग के दौरान महज 97 विधायक नजर आए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जयपुर से जैसलमेर के सफर में पहले हवाई जहाज में 54 विधायक चढ़े, दूसरे चार्टर प्लेन में मात्र 6 विधायक तो तीसरे प्लेन में 37 विधायक रवाना हुए। इस तरह से सिर्फ 97 विधायक की शिफ्टिंग के लिए जयपुर से निकले।

बीजेपी पर निशाना साधा: 
विधायकों की शिफ्टिंग से पहले बसपा के 6 विधायकों का कांग्रेस में विलय को लेकर गहलोत बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने तेलगुदेशम पार्टी के 4 सांसदों को राज्यसभा के अंदर रातों रात मर्जर करवा दिया, वो मर्जर तो सही है और राजस्थान में 6 विधायक मर्जर कर गए कांग्रेस में, वो मर्जर गलत है, तो फिर इखढ का चाल-चरित्र-चेहरा कहां गया? राज्यसभा में मर्जर हो, वो सही है और यहां मर्जर हो, वो गलत है?