भारत में वैश्विक महंगाई चिंताजनक

भारत में वैश्विक महंगाई चिंताजनक

 नई दिल्ली। वैश्विक महंगाई से भारत के भी प्रभावित होने का हवाला देते हुये केंद्रीय वित्त मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों ने कहा कि यह बहुत गंभीर स्थिति है और किसी देश के लिए अभी अकेले इस समस्या का समाधान निकालना कठिन है। उन्होंने महंगाई को छह प्रतिशत तक के लक्षित दायरे में कब तक लाया जा सकेगा पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया लेकिन कहा कि तेल की कीमतों को कम करने के लिए कांग्रेस नीति संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की तरह तेल बाँड आधारित सब्सिडी नहीं दी जा सकती है। सूत्रों ने कहा कि महामारी के कारण पहले बाधायें उत्पन्न हुई थी और अब यूक्रेन रूस जंग के कारण वैश्विक स्तर पर आपूर्ति बाधित हो रही है। इसके कारण महंगाई में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन रूस जंग के साथ साथ चीन में लंबे समय से चल रहे लॉकडाउन के कारण कच्चे माल की आपूर्ति बाधित हुई है। इसके कारण वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ी है। जंग के कारण तेल के साथ ही प्राकृतिक गैस की आपूर्ति भी बाधित हुयी है। उन्होंने कहा कि अब तक जो देश रूस और यूक्रेन से विभिन्न कमोडिटी आदि की खरीद कर रहे थे वे दूसरे देशों का रूख कर रहे हैं। जो देश रूस से तेल और प्राकृतिक गैस की खरीद करते थे अब वे पश्चिम एशिया का रूख कर रहें जिसके कारण भारतीय बॉस्केट में कच्चे तेल की औसत कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुयी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021-22 में कंटेनर और चिप की कमी आयी थी और अब उसके बाद यूक्रेन युद्ध के कारण नई चुनौतियां उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि आम बजट में किसी अपात स्थिति की परिकल्पना नहीं की जा सकती है। भारत में तिलहन का उत्पादन कम हो रहा है। वर्ष 2016-17 में देश में सरकार की प्रोत्साहन नीतियों के कारण दलहन की पैदावार में बढ़ोतरी हुई थी और मांग की पूर्ति करने की स्थिति बनी है। लेकिन तिलहन के मामले में अभी भी आत्मनिर्भरता नहीं मिली है। हालांकि असम और कुछ अन्य राज्यों में पॉम की खेती शुरू की गयी है जिसके परिणाम आने में कुछ समय लगेगा। उन्होंने कहा कि हमारे देश में नेफेड और अन्य विपणन्न एजेसियों के पास भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण वे भंडारण नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने तेल की बढ़ती कीमतों पर आम लोगों को राहत देने के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा तेल बाँड आधारित सब्सिडी देने को क्लासिक उदाहरण बताते हुये कहा कि उस सरकार की तरह व्यवस्था नहीं की जा सकती है।