अंतिम सफर पर महारानी महारानी

अंतिम सफर पर महारानी महारानी

 एलिजाबेथ द्वितीय को सोमवार को अंतिम विदाई दी गई। उनके ताबूत को विंडसर कैसल स्थित सेंट जॉर्ज चैपल के शाही वॉल्ट (शव कक्ष) में नीचे रखा गया। ब्रिटिश शाही परिवार में सर्वाधिक वरिष्ठ अधिकारी लॉर्ड चैम्बरलैन ने ‘राजदंड’ तोड़ने की रस्म पूरी की। राजदंड तोड़ने की रस्म राजशाही के प्रति उनकी सेवाओं की समाप्ति का प्रतीक है। महारानी को पति प्रिंस फिलिप के बराबर में दफनाया गया। महारानी के अंतिम संस्कार में 20 लाख से ज्यादा लोग जुटे। इस मौके पर शाही परिवार और भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ ही कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रमुख नेताओं समेत 2,000 मेहमान महारानी को श्रद्धांजलि देने यहां पहुंचे थे। महारानी का ताबूत 11वीं सदी के ऐतिहासिक एबे पहुंचा तो एलिजाबेथ टावर में लगी बिग बेन में एक-एक मिनट बाद 96 बार घंटा बजाया गया। उनकी अंतिम यात्रा को जगह- जगह तोपों की सलामी दी गई।

जगुआर में आया ताबूत, पीछे चल रही थी रेंज रोवर, दोनों के निर्माता टाटा

महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को अंतिम विदाई देने के लिए शाही कारों का काफिला नजर आया। किंग चार्ल्स तृतीय और प्रिंस विलियम जहां एक साथ बेंटले की लिमोजिन कार में सवार होकर पहुंचे, वहीं उनकी पत्नियां कैथरीन-प्रिंसेस आॅफ वेल्स तथा कैमिला-क्विन कंसोर्ट भी एक साथ रोल्स-रॉयस फैंटम-6 से पहुंचीं। महारानी का ताबूत जगुआर में था। इसके पीछे रेंज रोवर और मर्सिडीज जैसी कारें भी शामिल थीं। जगुआर और रेंज रोवर कारों का निर्माण भारतीय कंपनी टाटा करती है।

  शाही काफिले में शामिल वाहन
    वाहन                                   निर्माता
लिमोजिन                                    बेंटले
रोल्स-रॉयस                   फैंटम-6 बीएमडब्ल्यू
रेंज रोवर                                 टाटा मोटर्स
मर्सिडिज बेंज                    डेमलर मोटर कॉर्प.
जगुआर-एक्सजे                      टाटा मोटर्स