चीते की खुशी में व्हाइट टाइगर भूली सरकार GIS में नहीं की ब्रांडिंग

चीते की खुशी में व्हाइट टाइगर भूली सरकार GIS में नहीं की ब्रांडिंग

भोपाल। मप्र की धरती पर देश का सबसे महत्वाकांक्षी चीता प्रोजेक्ट शुरू होने की खुशी में राज्य सरकार ने अपने ‘व्हाइट टाइगर’ की उपलब्धि को ही भुला दिया। इंदौर में संपन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में दुनियाभर से आए उद्योगपति मेहमानों के लिए आयोजित भव्य प्रदर्शनी एरिया में पर्यटन विभाग की प्रदर्शनी चीते पर ही फोकस रही। वाइल्ड लाइफ टूरिज्म के बतौर मप्र को चीता, तेंदुआ, टाइगर और क्रोकोडायल स्टेट के रूप में खूब प्रचारित किया गया, लेकिन व्हाइट टाइगर का जिक्र तक नहीं किया गया। यह तब है, जबकि विश्व के कई देशों में आज जो व्हाइट टाइगर हैं, वे सभी मप्र की देन हैं। रीवा स्थित मुकुंदपुर के जंगलों में दुनिया की पहली व्हाइट टाइगर सफारी मौजूद है। बावजूद इसके इन्वेस्टर्स समिट में 84 देशों से आए मेहमानों के सामने सबसे खूबसूरत और मप्र की शान व्हाइट टाइगर की अनदेखी कर दी गई। भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क सहित इंदौर, ग्वालियर, रीवा स्थित मुकुंदपुर सफारी और संजय टाइगर रिजर्व में सफेद बाघ मौजूद हैं। देश में इस वक्त व्हाइट टाइगर की संख्या करीब 80-100 बताई गई है। मप्र के चार शहरों में ही करीब एक दर्जन व्हाइट टाइगर बाड़ाबंदी में रखे गए हैं। दिल्ली, ओडिशा, कर्नाटक, बिहार और अन्य राज्यों में विंध्य-बांधवगढ़ के व्हाइट टाइगर की संतानें ही भेजी गई हैं। ब्रिटेन और अमेरिका में तो सफेद बाघ सीधे रीवा से ही भेजे गए थे।1111

मोहन की संतानें हैं पूरी दुनिया में दुनिया में

मप्र को ही व्हाइट टाइगर की ब्रीडिंग करने का श्रेय है। रीवा महाराज मार्तण्ड सिंह ने मई 1951 में सबसे चर्चित व्हाइट टाइगर ‘मोहन’ को दुनिया के सामने पेश किया था। आज पूरी दुनिया में जितने भी व्हाइट टाइगर हैं, वे सब मोहन की ही संतानें हैं। व्हाइट टाइगर पर रिसर्च एवं पुस्तक लिख चुके वरिष्ठ पत्रकार जयराम शुक्ल कहते हैं कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में सरकार ने व्हाइट टाइगर की ब्रांडिंग का बड़ा अवसर खो दिया। प्रदेश के जिम्मेदार अधिकारी इस मुद्दे पर मौन हैं।

प्रदर्शनी में चीता और तेंदुए

विशाल प्रदर्शनी पंडाल में विभिन्न राज्यों के अलावा कई देशों के प्रमुख आकर्षक उत्पाद, मॉनुमेंट्स और वाइल्ड लाइफ आदि की ब्रांडिंग की गई थीं। इनमें सौराष्ट्र स्थित सोमनाथ मंदिर और मप्र पर्यटन की प्रदर्शनी लुभाती रही। टूरिज्म के स्टाल पर बड़ी एलईडी स्क्रीन पर लंबी कुलांचे भरते चीता को दिखाया गया था। साथ ही प्रमुख पर्यटन स्थलों का ब्यौरा भी था।

पीएम ने दी थी सौगात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल सितंबर में अपने जन्मदिन पर नामीबिया से आए 8 चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़कर मप्र को बड़ी सौगात और चीता स्टेट का तमगा भी दे दिया। इस घटना ने पूरी दुनिया के वाइल्ड लाइफ प्रेमियों का ध्यान खींचा। मप्र में करीब 115 साल पहले रीवा में सबसे पहले महाराज वेंकटरामन ने व्हाइट टाइगर पकड़ा था।

मप्र टाइगर स्टेट है, व्हाइट टाइगर हमारी शान है। हम इसकी जोर-शोर से ब्रांडिंग पर फोकस कर रहे हैं। अगले महीने टाइगर की गिनती भी शुरू करा रहे हैं। - विजय शाह, वन मंत्री मप्र