बड़वानी में ‘मिशन उम्मीद’ से संस्थागत प्रसव 85% पहुंचा

बड़वानी में ‘मिशन उम्मीद’ से संस्थागत प्रसव 85% पहुंचा

 भोपाल। प्रदेश में मातृ और शिशु मृत्यु दर कम करने विभिन्न जिलों में नवाचार किए जा रहे हैं। इनमें एक बड़वानी जिला भी है। यह जिला आदिवासी बहुल है। जिले में दुर्गम पहाड़ियां हैं और सड़कें नहीं होने की वजह से महिलाएं सरकारी अस्पताल नहीं पहुंच पा रही थीं और घरों में ही प्रसव कराए जा रहे थे। इससे कई बार मां और शिशु की मृत्यु का खतरा बना रहता था। इसे रोकने के लिए कलेक्टर शिवराज सिंह वर्मा ने करीब एक साल पहले 'मिशन उम्मीद' अभियान शुरू किया था। इसके अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं। अब तक ढाई हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाकर संस्थागत प्रसव कराया गया। सभी महिलाएं और शिशु स्वस्थ हैं। इस नवाचार से जिले में संस्थागत प्रसव 50 से बढ़कर 85 प्रतिशत तक पहुंच गया है। मिशन उम्मीद शुरू करने के दौरान निर्णय लिया गया कि जो व्यक्ति गर्भवती महिला को सरकारी अस्पताल तक लाएगा, उसे प्रति 5 किमी पर एक हजार और 10 किमी पर दो हजार रुपए रेडक्रॉस से उपलब्ध कराए जाएंगे। गांव स्तर पर एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की 'ममता ब्रिगेड' बनाई गई। इनमें अच्छे कार्य करने वालों को पुरस्कृत किया गया।

कुपोषित बच्चों के लिए खिलौना बैंक

कुपोषित बच्चों को स्वस्थ करने के लिए जिले में 6 पोषण पुनर्वास केंद्र बनाए गए। यहां जन सहभागिता से ‘खिलौना बैंक’ विकसित किया गया। बेड आॅक्यूपेंसी में बड़वानी जिले का एनआरसी केंद्र पिछले 20 माह से मप्र में प्रथम स्थान पर है। पोषण पुनर्वास केंद्र से डिस्चार्ज बच्चों को घर पर 15 दिन के लिए शुद्ध देशी घी के लड्डू और ड्राई फू्रट्स दिए जाते हैं।

यह हुआ असर : आठ माह में 1334 बच्चों में से 1021 बच्चों के वजन में बढ़ोतरी हुई।

नवाचारों से जिले के पिछड़ेपन में कमी आई

जिले में लागू किए इन नवाचारों के कारण ही नीति आयोग ने 13 करोड़ के अलग-अलग अवॉर्ड दिए। आदिवासी बहुल जिले में प्रमुख फोकस जन्म और मृत्यु दर सूचकांक में कमी लाना है। मिशन उम्मीद की सफलता पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में भी कहा था कि इस तरह के नवाचार अन्य जिलों में भी किए जा सकते हैं। - शिवराज सिंह वर्मा, कलेक्टर, बड़वानी