छात्रों के साथ अभद्रता पर झाबुआ SP को हटाया फिर CM ने किया सस्पेंड

छात्रों के साथ अभद्रता पर झाबुआ SP को हटाया फिर CM ने किया सस्पेंड

भोपाल। रविवार रात पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्रों से अभद्रता करने वाले झाबुआ एसपी अरविंद तिवारी को सरकार ने सोमवार को पहले हटाया। उसके बाद सीएम के आदेश पर सस्पेंड कर दिया। उन्हें पीएचक्यू में अटैच किया गया है। मामले को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुबह सीएस और डीजीपी के साथ बैठक की और तिवारी को हटाने के निर्देश दिए थे। एसपी द्वारा छात्रों के साथ अभद्रता का ऑडियो वायरल होने के बाद सीएम ने डीजीपी को जांच के निर्देश दिए थे। जांच में ऑडियो में एसपी की आवाज की पुष्टि होने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया। क्या है मामला : रविवार रात पॉलिटेक्निक कॉलेज के हॉस्टल में शराब के नशे में कुछ छात्रों में लड़ाई हुई थी। छात्र थाने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने शिकायत नहीं सुनी। इसके बाद छात्रों ने एसपी अरविंद तिवारी को फोन कर प्रोटेक्शन की मांग की थी। इस पर एसपी ने उनसे गाली-गलौज की।

शिवराज बोले- भांजों से दुर्व्यवहार सहन नहीं होगा

मुख्यमंत्री ने कहा-मेरे भांजों (छात्रों) ने एसपी से कुछ मांग की थी। मैंने वायरल आॅडियो की जांच कराने के निर्देश दिए थे। जांच में पाया गया कि एसपी ने बच्चों के साथ अपशब्दों का इस्तेमाल किया। इसे मैं सहन नहीं करूंगा, इसलिए एसपी को तत्काल सस्पेंड करता हूं।

राज्य पुलिस सेवा से आईपीएस बने हैं तिवारी

इधर, जांच में छात्रों के साथ वार्तालाप के दौरान अपशब्दों का प्रयोग करते पाए जाने पर झाबुआ एसपी तिवारी को अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण नियम)1968 के नियम-3 में प्रावधानों के तहत निलंबित कर उनका मुख्यालय पीएचक्यू निर्धारित किया गया है। तिवारी राज्य पुलिस सेवा से आईपीएस के पद पर प्रमोट हुए हैं।

आखिर क्यों...सीएम की सख्ती के बाद ही प्रशासन की सुस्ती टूटती है

म ध्यप्रदेश के सिस्टम में एक अजीब सा बदलाव देखने में आ रहा है। जब तक सीएम किसी मुद्दे पर तल्खी नहीं दिखाते या निर्देश नहीं देते, तब तक उस विषय पर संतोषप्रद कार्रवाई नहीं दिखती। सवाल उठता है कि क्या उनके कैबिनेट के साथी और अफसर उनके साथ कदमताल नहीं कर पा रहे हैं? भोपाल के प्रतिष्ठित स्कूल में मासूम के साथ हुए दुष्कर्म का मामला ही देखें, जब तक सीएम ने सख्त कदम उठाने की बात नहीं की तब तक प्रशासन भी खानापूर्ति में व्यस्त रहा, जबकि इस मामले ने राजधानी को हिलाकर रख दिया था। रविवार रात ही झाबुआ में जो घटा, क्या उस मामले में आला पुलिस अधिकारी स्वविवेक से एसपी अरविंद तिवारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकते थे? जब सीएम के संज्ञान में मामला आया तभी झाबुआ एसपी को निलंबित किया गया। इसी तरह रीवा में गैंगरेप मामले में भी सीएम के हस्तक्षेप के बाद आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चले। इससे पहले सीएजी की कुपोषण मामले में आई ड्राμट रिपोर्ट पर भी सीएम ने अकेले ही स्पष्ट किया कि सच्चाई क्या है। विधानसभा में भी वे इस मामले में अकेले ही संघर्ष करते दिखाई दिए। उनकी तरफ के लोगों का उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता नहीं दिखा। जबलपुर में जब टनों यूरिया गायब हो गया था, तब भी मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद यह यूरिया निजी गोदामों से बरामद हुआ था। आखिर क्या वजह है प्रदेश के अधिकारी किसी कार्रवाई के पहले सीएम के इशारे की बाट जोहते हैं? क्या वे खुद इतने सक्षम नहीं, कि ऐसे मामलो में खुद आगे बढ़कर कदम उठाएं?