कांग्रेस में एकला चलो का राग, अकेले किला लड़ा रहे कमलनाथ!

कांग्रेस में एकला चलो का राग, अकेले किला लड़ा रहे कमलनाथ!

भोपाल। मध्यप्रदेश की 27 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के नतीजों पर ही कांग्रेस की सत्ता में वापसी की सारी संभावनाएं टिकी हुई हैं। इसके बावजूद कांग्रेस के खेमे में वरिष्ठ नेताओं की एकजुटता नजर नहीं आ रही। पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ अकेले ही किला लड़ाते दिख रहे हैं। 2008 के चुनाव में जिस तरह तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी चुनाव में अकेले पड़ गए थे, वैसी ही स्थितियां अब फिर सामने हैं। इसके विपरीत सत्ताधारी दल भाजपा के दिग्गज पूरी ताकत से चुनावी मैदान में डटे हैं। कांग्रेस के लिए यह उपचुनाव ‘करो या मरो’ वाला है लेकिन मार्च में हुए सियासी उथल-पुथल और सरकार गिरने के बाद कमल नाथ ही अकेले संघर्ष करते दिख रहे हैं। सर्वे से लेकर कार्यकर्ताओं- पदाधिकारियों, विधानसभा क्षेत्रों की बैठकें हों अथवा टिकट के दावेदारों से बातचीत, सभी जगह केवल वही सक्रिय रहे। चुनाव प्रचार का शंखनाद हुआ तो भी संदेश देने अथवा दिखावे के लिए ही सही प्रदेश के बाकी दिग्गजों की उपस्थिति नजर नहीं आई। आगर जिले में कमलनाथ और दतिया जिले में दिग्विजय सिंह ही रहे। डॉ गोविंद सिंह पदयात्रा में व्यस्त हैं।

सत्ता में वापसी का मौका

मध्यप्रदेश में पहली बार 27 सीटों पर हो रहे उपचुनाव कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती और सत्ता में वापसी करने का मौका भी है। प्रदेश सरकार में वापसी और बहुमत के लिए उसे ही ज्यादा सीटें जीतना है। कमल नाथ के अलावा कांग्रेस के अन्य दिग्गज नेता मसलन अजय सिंह, सुरेश पचौरी, अरूण यादव, कांतिलाल भूरिया और आरिफ अकील आदि नेताओं की सार्वजनिक तौर पर सक्रियता नजर नहीं आ रही। इनके अतिरिक् त कांग्रेस के पास महारथी के तौर पर एनपी प्रजापति, रामनिवास रावत, बाला बच्चन, सज्जन सिंह वर्मा, जीतू पटवारी, पीसी शर्मा और हुकुम सिंह कराड़ा जैसे कई नेता हैं, लेकिन ये चुनावी रण में नजर नहीं आ रहे। हालांकि पचौरी और अकील के सामने स्वास्थ्यगत कारण है।