मप्र में सरकारी नौकरियां स्थानीय लोगों को मिलेंगी, बनेगा कानून

मप्र में सरकारी नौकरियां स्थानीय लोगों को मिलेंगी, बनेगा कानून

भोपाल। मप्र में सरकारी नौकरियां केवल राज्य के युवाओं को देने के लिए सरकार ने मंगलवार को बड़ा फैसला लिया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इसके लिए जरूरी कानून बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मप्र के संसाधन केवल प्रदेश के बच्चों के लिए होंगे। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। अभी तक प्रदेश में सरकारी नौकरी की भर्ती के लिए पूरे देश से आवेदन मांगे जाते थे। इसमें कोई बंदिश नहीं थी। हाल ही में जेल प्रहरी भर्ती का विज्ञापन भी ऑल इंडिया स्तर पर निकाला गया था। इसे लेकर प्रदेश के युवाओं ने काफी विरोध भी किया था। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों की भर्ती प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (पीईबी) द्वारा की जाती है, जबकि प्रथम और द्वितीय श्रेणी के लिए भर्ती पीएससी द्वारा की जाती है।

क्लास थ्री और फोर्थ के लिए कोई दिक्कत नहीं

सीएम की घोषणा से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की भर्ती में कोई दिक्कत नहीं होगी, इसके लिए नियम बन सकता है। क्लास टू और प्रथम श्रेणी की भर्तियों के लिए नियम जीएडी बनाता है। जीएडी किस तरह का नियम बनाता है, उसकी भाषा क्या होगी, उस आधार पर निर्णय होगा। इस मामले में लोग कोर्ट भी जा सकते हैं। इससे इसे लागू करने में देरी हो सकती है।

यह चुनावी घोषणा बनकर न रह जाए : नाथ

शिवराज की घोषणा पर पूर्व सीएम कमल नाथ ने कहा कि मैंने अपने 15 माह के कार्यकाल में उद्योग नीति में परिवर्तन किया था और 70 प्रतिशत रोजगार स्थानीय युवाओं को देना अनिवार्य किया था। शिवराज 15 वर्ष बाद आज युवाओं के रोजगार को लेकर नींद से जागे हैं। लेकिन यह सिर्फ घोषणा बनकर ही न रह जाए। प्रदेश के युवाओं के हक के साथ छलावा न हो अन्यथा कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।