एमयू व छिंदवाड़ा विवि शुरू होने से घटी आय, एफडी तुड़वाकर गुजारा कर रहा रादुविवि

एमयू व छिंदवाड़ा विवि शुरू होने से घटी आय, एफडी तुड़वाकर गुजारा कर रहा रादुविवि

जबलपुर । रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति दिनों दिन खराब होते जा रहे है। मेडिकल कॉलेज एवं छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय खुल जाने से 100 कॉलेज करीब विवि की संबद्धता से बाहर हो गए है। जबकि इसके पहले 244 कॉलेज रादुविवि से जुड़े हुए थे, लेकिन अब 170 महाविद्यालयों की संबद्धता बची है। जिसके कारण रादुविवि की आय भी घट गई है,और रानी दुर्गावती विवि कंगाली की तरफ बढ़ रहा है, अब कर्मचारियों का वेतन भी एफडी तुड़वाकर किया जा रहा है। गौरतलब है कि छिंदवाड़ा यूनिवर्सिटी के खुलने के पहले विवि की आय 90 करोड़ के लगभग थी, बजट भी अच्छा खासा था, लेकिन अब 60 करोड़ रुपए आय बची है। हालात यह है कि पहले की अपेक्षा अब कम छात्र बचे है। अभी वर्तमान में प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष के मिलाकर 150 लाख छात्र-छात्राएं है। जिसके कारण पहले छात्रों की अच्छी खासी संख्या थी जिनसे मिलने वाली फीस से ही कर्मचारियों का वेतन व खर्च निकल जाता था, लेकिन अब करीब खर्च निकालने के लिए कई बार एफडी तुड़वानी पड़ी।अभी तक तीन बार एफडी तुड़वाकर 15 करोड़ रुपए निकाले जा चुके है। जबकि अब तो नियमित प्रोफेसर भी 40 ही बचे है,पहले 150 प्रोफेसर थे। जिम्मेदारों की मनमानी और फिजूलखर्ची की वजह से आर्थिक कंगाली की तरफ विवि बढ़ रहा है।

ए-ग्रेड के लिए प्रयास जारी

विश्वविद्यालय को ए-ग्रेड का दर्जा दिलाने के लिए पिछले कई वर्षो से प्रयास किए जा रहे हैं। विवि के सूत्र बताते हैं कि ए-ग्रेड का दर्जा मिल जाने से विवि को सरकार की तरफ से स्पेशल ग्रांट मिलने लगती है। इसके अलावा भी कई तरह के फंड मिलते और सुविधाएं मिलने लगती है। गत वर्ष ए-ग्रेड के लिए विवि के अधिकारियों ने खूब प्रयास किए। इसके बाद भी यह नहीं मिल सका। बी ग्रेड से ही उन्हे संतोष करना पड़ा। अब तो विवि के हालात पहले से भी खराब है। इस बार बी-ग्रेड भी खतरे में पड़ सकता है।