‘मुंडा’ में माड़िया जनजाति का स्मृति स्तंभ एफबी पर देख

‘मुंडा’ में माड़िया जनजाति का स्मृति स्तंभ एफबी पर देख

I AM BHOPAL ।  इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय द्वारा कोविड-19 के दौरान दर्शकों को संग्रहालय से  ऑनलाइन   जोड़ने एवं उन्हें संग्रहालय के ऐतिहासिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के बारे में गहरी समझ को बढ़ावा देने 'सप्ताह का प्रादर्श' सीरीज शुरू की गई है। इसके अंतर्गत इस माह के अंतिम सप्ताह के प्रादर्श के रूप में ‘मुंडा’,बस्तर( छत्तीसगढ़) में रहने वाली माड़िया जनजाति का एक स्मृति स्तंभ प्रदर्शित किया गया। दर्शक इस का अवलोकन मानव संग्रहालय की वेबसाइट igrms. com व फेसबुक पेज के माध्यम से कर सकते हैं।

 नक्काशीदार सागौन की लकड़ी से बना स्तंभ 

‘मुंडा’ यह सागौन की ठोस लकड़ी के एक ही आयताकार टुकड़े से बना है। इसकी ऊंचाई लगभग 12 फीट है। इसमें चारो तरफ नक्काशीदार सुंदर अलंकरण है। स्तंभ के ऊपरी भाग में दो छोटी गुंबद जैसी संरचनाएं हैं। स्तंभ के एक तरफ पक्षियों और जानवरों की आकृतियां हैं तो दूसरी तरफ कृषि और आर्थिक गतिविधियों को जुताई और भार ढोने आदि दृश्यों के माध्यम से दिखाया गया है। स्तंभ के तीसरी तरफ लोगों के वैवाहिक और यौन जीवन का विवरण है, जबकि चौथे में नृत्य स्वरूपों और ढोल वादकों की प्रतिनिधि आकृतियों के साथ उत्सवों के उत्साह को दर्शाया गया है। यह स्तंभ सामुदायिक भावनाओं की अभिव्यक्तियों का प्रतीक है। इसे 1962 में बस्तर के एक गांव में एक राजनीतिक शख्सियत की स्मृति में बनवाया गया था।