इंदौर की 200 से अधिक महिलाएं बनीं आर्थिक समृद्धि की रीढ़, ई- ऑटो  चलाकर बदली परिवार की जिंदगी

इंदौर की 200 से अधिक महिलाएं बनीं आर्थिक समृद्धि की रीढ़, ई- ऑटो  चलाकर बदली परिवार की जिंदगी

 इंदौर। इंदौर की 200 से अधिक ऑटो  चालक महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक समृद्धि की रीढ़ बन इतिहास रच रही हैं। कोरोना महामारी में जब हर तरफ बेरोजगारी, आर्थिक अस्थिरता का वातावरण बना था तब ये मेहनतकश महिलाएं समाज के अक्षम तबके के लिए एक प्रेरणा बन उठ खड़ी हुर्इं। ऐसी ही दो महिलाओं से हमने जाना उनके जीवन के संघर्षों की कहानी उन्हीं की जुबानी कोरोना महामारी में जब बुटीक का काम ठप पड़ा, तब 47 वर्षीय अनुराधा वर्मा ने ऑटो  का एक्सलरेटर थाम लिया। उनकी तीन बेटियां हैं और तीनों ही उच्च शिक्षित हैं। स्कीम नंबर 78 में रहने वाली अनुराधा प्रतिदिन 7-8 घंटे ई-ऑटो  चलाकर 1,200 से 1,400 रुपए प्रतिदिन कमा रही हैं। उन्होंने बुटीक का काम दोबारा शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि महिला टैक्सी चालक होने से उन महिलाओं को राहत मिली है, जो देर शाम या रात तक दμतर से छूटकर घर जाने के लिए टैक्सी पर निर्भर थीं। ऐसी सभी कामकाजी महिलाओं और हमारे बीच मोबाइल नंबर का आदान-प्रदान हो चुका है। मैंने स्थाई कमाई देख एक प्लॉट और हाल ही में एक कार खरीदी है। पति कार को टैक्सी में चला रहे हैं।

दो साल में 70 हजार किमी टैक्सी चला चुकी हूं : रीना 38 वर्षीय रीना कामले 10 वर्ष की उम्र से कामकाजी मां का हाथ बंटाना शुरू कर दिया था। रेडीमेड के कारखाने में नौकरी कर चारों बहनों की शादी कराई। 17 वर्षीय बेटी की मां रीना ने 8-10 हजार की नौकरी छोड़ रोजना 10-12 घंटे इलेक्ट्रिक ऑटो  चला रही हैं। पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ती रीना ने खुद का घर खरीद लिया है।