मां बोली-आज कई दिनों बाद मेरे बच्चों को मिल पाया है दूध

मां बोली-आज कई दिनों बाद मेरे बच्चों को मिल पाया है दूध

मै कांच का सामान बनाकर भानपुर के फुटपाथ पर बेचती थी। जिससे घर चलाने लायक इनकम हो जाती थी, मगर अब काम बंद है और बचत के पैसे भी खत्म हो गए हैं, खाने के लाले पड़ चुके हैं, इसलिए मैं यहां काम ढूंढने आई हूं। इन लोगों ने मेरे दोनों बच्चों को दूध पिलाया और सत्तू शकर और खजूर भी दी। आज मेरे बच्चों ने कई दिनों बाद दूध पिया है। मैं इन लोगों का यह उपकार कभी नहीं भूलूंगी। यह कहना है दीवानगंज की रहने वाली महिला (परिवर्तित नाम) श्यामा बाई का, जो काम की तलाश में सूखी सेवनिया पहुंची थी। जहां अनेक सामाजिक संगठन इस दौरान प्रवासी मजदूरों के लिए खाना, पानी, दवा आदि का इंतजाम कर रहे हैं। बता दें कि इस दौरान श्यामा बाई के दोनों बच्चे उमेश और रचना को आवाज, यूनिसेफ और एनएसएस द्वारा दूध, सत्तू आदि दिया गया।

गुजरने वाले हर बच्चे को दिया जा रहा दूध एवं सत्तू: इस बारे में रोली शिवहरे ने बताया कि ब्रेड, अचार, पानी तो दे ही रहे हैं और साथ ही खासतौर पर बच्चों को दूध, सत्तू एवं खजूर देते हैं। क्योंकि ऐसे मौसम में बच्चों को एक अच्छी डाइट की बहुत जरूरत होती है। इसके अलावा परिंदे ग्रुप से सना अजहर ने बताया रोजाना यहां सैकड़ों गांव वाले खाने और काम की तलाश में आते हैं, जिसमें बुजुर्ग एवं बच्चे भी शामिल हैं। वे सभी लोग कहीं न कहीं मजदूरी के पेशे से जुड़े हैं और वह इन दिनों कई सारी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। बता दें कि पिछले करीब 2 दिनों से महाराष्ट्र से बिहार-यूपी की ओर जाने वाले श्रमिकों की संख्या घटी है।