2 वर्षों से विभागों में NGO के काम ठप, जन अभियान का दफ्तर सूना

2 वर्षों से विभागों  में NGO के काम ठप, जन अभियान का दफ्तर सूना

जबलपुर । जिले में एक सैकड़ा से अधिक एनजीओ हैं, जिन्हें जन परिषद के माध्यम से काम दिया जाता था और शासन की योजनाआ को प्रचार-प्रसार कराया जाता था। लेकिन इन दिनों जिले सहित प्रदेश भर में सरकारी विभागों की योजनाओं का प्रचार-प्रसार और जागरूकता गतिविधियां पूरी तरह बंद पड़ी है। क्योंकि पिछली सरकार ने जन अभियान परिषद पर ब्रेक लगा दिया था। जन अभियान परिषद के माध्यम से ही एनजीओ को काम दिया जाता था। एनजीओ के मिलने वाला रोजगार भी फिलहाल बंद है। वहीं विभागों के पास इतना अमला नहीं कि वह खुद मैदान में जाकर जरूरत वाली योजनाओं को लोगों तक पहुंचा सके। इन दिनों जन अभियान का दफ्तर भी सूना है। स्वास्थ्य विभाग के तहत टीकाकरण, महिला एवं किशोरियों के अलावा महिला बाल विकास पोषण आहार जैसी योजनाओं में एनजीओ के काम शुरू नहीं हुए। इसी तरह सामाजिक न्याय विभाग में जिन एनजीओ को तीन या पांच सालाना प्रोजेक्ट मिले थे, सिर्फ वहीं क्रियाशील हैं। शिक्षा विभाग, वनविभाग सहित आदिवासी, अल्पसंख्यक विभागों में भी दर्जनों योजनाओं को मैदान में पहुंचाने के लिए काम नहीं हो सका। जिले में ही गोशाला की जिम्मेदारी महिला स्व सहायता समूहों को देने का निर्णय हुआ था। लेकिन अभी तक सामाजिक संगठन या स्व-सहायता समूहों के नाम सामने नहीं आ सके। जो गोशाला की जिम्मेदारी संभालना चाहते हैं।

यहां का आफिस सूना

कमिश्नर कार्यालय परिसर में जन अभियान परिषद का कार्यालय है। यहां एक अकाउंटेंट ही बचा है। कार्यालय की जिम्मेदारी संयुक्त संचालक जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी को मिली है। स्टाफ को भी कलेक्टर कार्यालय में अटैच कर लिया गया। जिससे जन अभियान के दफ्तर में कोई नहीं मिलता। दफ्तर के कम्प्यूटर भी कमिश्नर कार्यालय और संयुक्त संचालक कार्यालय अपने पास रख चुके हैं।

सरकार बदलने से पूरा सिस्टम बंद

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की एनजीओ जिलों में निवेश करते आए हैं। लेकिन यह काम पहले जन अभियान परिषद की मॉनीटरिंग में होता था। लेकिन सरकार बदलने पर पूरा सिस्टम बंद कर दिया गया। अब नए सिरे से सरकार जन अभियान परिषद का सेटअप तैयार कर रही है। हालांकि जिला समन्वयक से लेकर अन्य पदों पर भर्ती भी की जाना है। राज्य सभा सदस्य रह चुके स्व.अनिल माधव दवे ने सबसे ज्यादा निवेश एनजीओ के माध्यम से प्रदेश में कराया था। आज भी उनके द्वारा नदियों को पुर्नजीवित करना,पर्यावरण, स्वास्थ्य,शिक्षा जैसे कार्यो की मिसाल दी जाती है।