हिंदी सिनेमा में धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहा पूर्वोत्तर का संगीत, आने वाले समय में और बढ़ेगा

हिंदी सिनेमा में धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहा पूर्वोत्तर का संगीत, आने वाले समय में और बढ़ेगा

 पहले सिंगर स्टूडियो में जाकर गाने रिकॉर्ड करते थे, लेकिन अब घर से ही रिकॉर्ड करके भेज देते हैं क्योंकि पहले के समय में टेक्नोलॉजी बहुत कम थी स्टूडियो में बहुत सारे इक्विपमेंट होते थे, जिसे घर पर नहीं ले जा सकते थे, लेकिन अब टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस हो गई है कि छोटे से इक्विपमेंट से आप गाने को रिकॉर्ड करके भेज सकते हैं। यह कहना था, बॉलीवुड सिंगर पापोन का जो अपने गीत, ये मोहवोह के धागे तेरी अंगुलियों से..., हमारी अधूरी कहानी..., तू जो मिला.... गाकर पॉपुलर हुए। वे गुरुवार को विश्वरंग समारोह में लाइव परफॉर्मेंस देने भोपाल आए हुए थे। इस दौरान उन्होंने आईएम भोपाल से खास बातचीत की। पूरी दुनिया तो भगवान ने भी नहीं घूमी होगी : दुनियाभर के कल्चरल इवेंट शामिल होने के सवाल पर पापोन ने कहा कि पूरी दुनिया कौन घूम सकता है, भगवान ने खुद नहीं घूमा होगा। लेकिन मैं काफी जगहों पर गया हूं और बहुत सी जगह अभी बची हैं जहां मुझे घूमना है। पापोन कहते हैं कि कोविड के दौरान मैंने दो-चार गाने लिखे थे, लेकिन उनमें से एक सेल्फ मोटिवेशन के लिए भी था जिसके बोल थे ‘दिन गुजारें वो...’। उस समय समझ नहीं आ रहा था कि μयूचर क्या होने वाला है, दुनिया का क्या होगा। सभी लोग एक शंका में थे। मैंने काले बादल वाली कहानी लिखा थी। उन्होंने बताया कि अगर आप में पैशन है तो यह भी निकल कर आएगा।

असम में मैंने बिहू बहुत गाया और फोक भी रिकॉर्ड किया

पूर्वोत्तर के म्यूजिक को हिंदी सिनेमा में जगह न मिलने के सवाल पर पापोन ने बताया कि यह कहना मुश्किल है, लेकिन हिंदी बेल्ट के लोग ज्यादा होने के कारण पूर्वोत्तर म्यूजिक को हिंदी सिनेमा में जगह नहीं मिली है। आने वाले समय में जरूर पूर्वोत्तर का म्यूजिक हिंदी सिनेमा में सुनने को मिलेगा। असम में मैंने बिहू गाना बहुत गाया है, इसके अलावा फोक स्टूडियो में भी रिकॉर्ड कर चुका हूं। प्रस्तुति की शुरुआत ‘याद आ रही है...’, ’आज जाने की जिद न करो...’, ‘तुझे कैसे पता न चला की तू मेनू प्यार कर दा है...’ पापोन ने 'एकला चोलो रे', 'क्यों' इत्यादि गाने गाए। युवाओं की भीड़ शाम से ही दिखने लगी थी

शहनाई पर सुनाई ‘मोहे रंग दो लाल-लाल

साहित्य, कला और संस्कृति के सबसे बड़े महोत्सव टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य कला महोत्सव ‘विश्वरंग’ का आगाज कुशाभाऊ इंटरनेशनल कनवेंशन सेंटर मिंटो हॉल परिसर में बड़ी धूमधाम के साथ हुआ। इसमें देश-विदेश के हजारों रचनाकारों, कलाकारों, साहित्यकारों ने शिरकत की। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में मप्र के राज्यपाल मंगूभाई पटेल उपस्थित रहे, उन्होंने दीप प्रज्वलन करके महोत्सव का शुभारंभ किया। टैगोर विवि के कुलाधिपति और विश्वरंग के निदेशक संतोष चौबे, सह निदेशक, लीलाधर मंडलोई, मुकेश वर्मा, डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी, डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स, डॉ. पल्लवी राव चतुर्वेदी, डॉ. विजय सिंह विशेष रुप से उपस्थित रहे। सागर से आए राष्ट्रीय शहनाई वादक हाजी मोहम्मद याकूब अली खान एवं समूह ने उद्घाटन समारोह में शहनाई की मधुर तान के साथ विश्वरंग में एक अनूठा समां बांधा। याकूब ने शहनाई से फेमस गाने ‘मोहे रंग दो लाल लाल...’ और ‘याद पिया की आने लगी...’ जैसे गानों को बजाया। याकूब ने अपनी परफॉर्मेंस से श्रोताओं कों मत्रमुग्ध कर दिया है।