मोटे लोगों को कोरोना का ज्यादा खतरा: एसीई-2 रिस्पेटर की वजह से हाई रिस्क

मोटे लोगों को कोरोना का ज्यादा खतरा: एसीई-2 रिस्पेटर की वजह से हाई रिस्क

मुंबई । कोरोना का मोटापे के साथ भी कनेक्शन सामने आ रहा है। ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि ज्यादा वजन और मोटे लोग कोरोनावायरस की चपेट में आने पर गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। उनकी मौत होने की आशंका भी ज्यादा है। एक अन्य शोध में पाया गया कि बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 से ज्यादा वाले लोगों में कोरोना से संक्रमित होने का जोखिम ज्यादा होता है। जो जितना ज्यादा मोटा होगा, उसे कोरोना का रिस्क उतना ज्यादा होगा। पहले भी जब इन्फ्लुएंजा महामारी, स्वाइन फ्लू बीमारी आई थी, तब भी मोटे लोग हाई रिस्क कैटेगरी में थे।

डॉक्टरों के मुताबिक मोटे लोगों के सेल्स में एसीई-2 रिस्पेटर होते हैं। इसके चलते अधिक वजन और मोटे लोगों को कोरोना का खतरा ज्यादा है। ऐसा कुछ एक स्टडी में पाया भी गया है। दरअसल, फैट सेल्स में एसीई-2 रिस्पेटर लंग्स से भी ज्यादा पाए गए। ये रिस्पेटर जिन सेल्स में ज्यादा होंगे, उनमें वायरस का खतरा उतना ही ज्यादा होता है। 

मोटापा या वजन बढ़ने के पीछे कई आदतों को जिम्मेदार बताती हैं। कहती हैं कि मोटापा जेनेटिक भी होता है, एक्टीविटी कम होने, डेस्क जॉब होने से भी वजन बढ़ता है। बच्चों में मोटापा मैदान में न खेलने से आता है। डाइट में जंक फूड लेने या फूड पैटर्न में बदलाव से भी वजन बढ़ने का डर रहता है। रात में नींद नहीं पूरी होना या रात में ज्यादा खाना खाने से मोटापा बढ़ता है।

जिन घरों में पतली छननी से आटा छनता है, उसमें ज्यादा चोकर निकला जाता है। इसके चलते रोटी के जरिए मिलना वाला फाइबर नहीं मिल पाता है। चोकर में फाइबर होता है। इसलिए आटे को बहुत पतली छननी से न छानें। इसके अलावा दिन भर में 2 से ढाई लीटर पानी जरूर पिएं, क्योंकि कम पानी पीने से भी वजन बढ़ता है।

मोटापा या ज्यादा वजन होना कई सारी बीमारियों की वजह माना जाता है। ऐसे लोगों को सांस की बीमारी, हाइपर टेंशन, डायबिटीज का खतरा ज्यादा होता है। सोते समय इन्हें खरार्टा भी आता है। कई बार मोटापे की वजह से शरीर में सूजन जैसी स्थिति बन जाती है। स्ट्रोक का भी खतरा ज्यादा होता है। कार्डियोवेस्कुलर डिसीज, गाउट, ज्वाइंट की समस्या होती है।