आनलॉइन क्लास, यानी स्क्रीन टाइम के साथ डेटा खर्च बढ़ा, फोन और नेटवर्क की भी समस्या

आनलॉइन क्लास, यानी स्क्रीन टाइम के साथ डेटा खर्च बढ़ा, फोन और नेटवर्क की भी समस्या

भोपाल।  कोरोना काल में शुरू हुई आनलॉइन क्लासेस की यात्रा में डेटा की कमी आड़े आने लगी है। अभिभावकों का कहना है कि ऑनलाइन   क्लासेस से फायदे से ज्यादा परेशानी हो रही है। एक तरफ पेरेंट्स बच्चों के बढ़े हुए स्क्रीन टाइम को लेकर चिंतित हैं तो दूसरी ओर जेब पर बढ़ता डाटा का खर्च है। कई अभिभावक ऐसे हैं जो दो बच्चों के बीच एक मोबाइल होने और नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे हैं। कई अभिभावकों ने नेटवर्क की समस्या से बचने के लिए प्रीपेड प्लान के साथ वाई-फाई लिया है, लेकिन इसके लिए उन्हें हर महीने 800 से 1,000 रुपए तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। ऐसी ही परेशानियां शिक्षकों के सामने भी आ रही हैं। साइबर एक्सपर्ट मनोज श्रीवास्तव कहते हैं कि एक आम व्यक्ति औसत एक से डेढ़ जीबी डेटा का प्लान लेता है। इसमें 25 प्रतिशत अपडेट में ही खर्च हो जाता है। ऐसे में ऑनलाइन   क्लास के लिए ज्यादा डेटा लेना पड़ रहा है।

 अभिभावकों की परेशानिया 

दोनों बच्चों की क्लास एक समय पर होती है। मेरे पास एक फोन हैं, ऐसे में किसी एक की क्लास को चुनना पड़ता है। डेटा प्लान भी बदला है। हर माह 300 रुपए खर्च बढ़ा है। रचना शर्मा,पेरेंट, गोविंद गार्डन नेटवर्क प्राब्लम के कारण आधी क्लास ऐसे ही निकल जाती थी, अत: वे परेशान होते थे। आखिर मैंने घर में वाई-फाई लगवा लिया। इससे 800 रुपए खर्च बढ़ गया है। मनप्रीत अजनानी,होशंगाबाद रोड बच्चों के लंबे समय तक स्क्रीन टाइम से उनपर मानसिक और शारीरिक असर हो सकता है। उनमें आत्मसंयम की कमी, जिज्ञासा में कमी, भावनात्मक स्थिरता न होना, ध्यान केंद्रित न कर पाना, आसानी से दोस्त नहीं बना पाना, जैसी समस्याएं हो सकती हैं। नॉर्मल अटेंशन स्पेस 20 से 30 मिनट होता है। यह ज्यादा से ज्यादा 40 मिनट हो सकता है। आंखों में पानी आना, सूखापन, जलन, आंखों में लालपन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। - डॉ. आरएस मनीराम, फिजीशियन