श्रीलंकाई संसद में सिर्फ 1 सीट, फिर भी पीएम बने विक्रमसिंघे

श्रीलंकाई संसद में सिर्फ 1 सीट, फिर भी पीएम बने विक्रमसिंघे

कोलंबो। अपने इतिहास के गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में रानिल विक्रमसिंघे को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। श्रीलंका की 225 सदस्यीय संसद में पूर्व पीएम रानिल विक्रमसिंघे की यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) की केवल एक सीट है। देश की सबसे पुरानी पार्टी यूएनपी 2020 में एक भी सीट नहीं जीत सकी थी और यूएनपी के मजबूत गढ़ रहे कोलंबो से चुनाव लड़ने वाले विक्रमसिंघे भी हार गए थे। बाद में वह कम्युलेटिव नेशनल वोट के आधार पर यूएनपी को आवंटित राष्ट्रीय सूची के माध्यम से संसद पहुंच सके। इससे पहले श्रीलंकाई राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के कहने पर महिंदा राजपक्षे ने पीएम पद से इस्तीफा दिया था। विक्रमसिंघे की नियुक्ति को सत्तारूढ़ श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना समेत सभी विपक्षी दलों ने अपना समर्थन दिया है।विक्रमसिंघे फिलहाल अंतरिम सरकार के पीएम बनाए गए हैं। उनकी सरकार 6 महीने चल सकती है। इस दौरान उन्हें देश को आर्थिक संकट से निकालने के इंतजाम करने होंगे।

4 बार पीएम रह चुके हैं रानिल विक्रमसिंघे

वकालत की डिग्री हासिल करने वाले विक्रमसिंघे देश के अनुभवी नेताओं में शुमार हैं। श्रीलंका में कई मंत्रालयों के मंत्री रह चुके विक्रमसिंघे 1993 में पहली बार प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद वह 4 बार पीएम रहे हैं। हालांकि 2018 में राष्ट्रपति रहे मैत्रीपाला सिरीसेना ने उन्हें हटा दिया था।

गोटाबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग शुरू

इसी बीच श्रीलंका के विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के इस्तीफे की भी मांग शुरू हो गई है। संसद में 17 मई को गोटाबाया राजपक्षे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। कई विपक्षी दलों ने गुरुवार को हुई बैठक में इस बारे में फैसला लिया।

माना जाता है भारत का समर्थक

लगभग दो दशकों से श्रीलंका की राजनीति में मजबूत आधार बने रहे महिंदा राजपक्षे चीन समर्थक माने जाते रहे हैं। राजपक्षे के शासनकाल में चीन को श्रीलंका में कई बड़ी परियोजनाएं हाथ लगी। यह राजपक्षे का ही दौर था जिसमें भारत के संबंध श्रीलंका से खराब होते चले गए। वहीं, रानिल विक्रमसिंघे को भारत समर्थक माना जाता है। वह भारत के साथ संबंध प्रगाढ़ करने के प्रबल हिमायती रहे हैं।

रानिल के सामने चुनौतियां

नए पीएम विक्रमसिंघे के सामने सबसे बड़ी चुनौती कर्ज तले डूबती अर्थव्यवस्था को बचाना है। इस समय श्रीलंका भारी कर्ज में चल रहा है, हालात इतने खराब हैं कि कर्ज चुकाने के लिए भी कर्जा लेने की नौबत आ गई है।

राजनीतिक अस्थिरता की वजह से श्रीलंका में बड़े स्तर पर हिंसा देखने को मिली है। ऐसे में कानून व्यवस्था को फिर दुरुस्त करना भी उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।

इस समय श्रीलंका में महंगाई सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है, जरूरी वस्तुओं की भारी कमी देखने को मिल रही है। इस पर कंट्रोल करना होगा।

इधर महिंदा राजपक्षे समेत 17 सहियोगियों के देश छोड़ने पर रोक

इस बीच श्रीलंका में कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के देश छोड़ने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने उनके 16 अन्य सहयोगियों पर भी श्रीलंका से बाहर जाने पर रोक लगा दी है। इस लिस्ट में महिंदा राजपक्षे के बेटे और पूर्व मंत्री नमल राजपक्षे भी शामिल हैं।