कान्हा-बांधवगढ़ नेशनल पार्क की सरहद से अतिक्रमण हटाने की तैयारी

कान्हा-बांधवगढ़ नेशनल पार्क की सरहद से अतिक्रमण हटाने की तैयारी

जबलपुर । नेशनल पार्कों के जंगलों में मानवीय दस्तक एक बड़ी चुनौती है, पिछले एक दशक से प्रदेश के कान्हा, पेंच, बांधवगढ़, पन्ना, सतपुड़ा, संजय गांधी टाइगर रिजर्व की सरहद पर बसे गांवों का दखल जंगल में बढ़ा है। ऐसे में लगातार पार्क प्रबंधन द्वारा पट्टा आदि का आवंटन कर जंगल की सरहद को सुरक्षित करने की कवायद की जाती रही है। उल्लेखनीय है कि कोविड-19 के संकट में इस वर्ष अप्रैल-मई माह में पार्क पूरी तरह से बंद रहे, जून में 15 दिन जरूर पार्क खुले, लेकिन मानसून सत्र शुरू होते ही 31 जुलाई से पार्कों में फिर ताले लटक गए हैं। अब 15 अक्टूबर से पर्यटन सत्र के शुभारंभ की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि अब तक इस संबंध में कोई निर्देश मुख्यालय से जारी नहीं किए गए हैं। एक ओर जहां पार्कों में पर्यटकों की आवाजाही बंद हैं, ऐसे में कान्हा नेशनल पार्क और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अतिक्रमणों पर शिकंजा कसने की कवायद शुरू हो गई है। पार्क प्रबंधन द्वारा पूर्व में भी अतिक्रमणों को हटाने की दिशा में कार्रवाई की गई है, प्रबंधन के अनुसार यह निरंतर प्रक्रिया है, जिसमें कई कानूनी जटिलताओं के बीच ग्रामीणों से चर्चा के बाद जंगल की जमीन को कब्जा मुक्त करने का कार्य किया जाता है।

एक नजर में कान्हा की स्थिति

1134 वर्ग किमी में पार्क का विस्तार।

पार्क में कुल 6 रेंज, 120 बीट हैं।

बफर जोन में करीब 160 गांव हैं।

गांवों में करीब एक लाख जनसंख्या, 70 हजार मवेशी।

बांधवगढ़ में ये है स्थिति

1536 वर्ग किमी में पार्क का विस्तार।

पार्क में कुल 7 रेंज, 130 बीट हैं।

पार्क की सरहद से लगे हैं करीब 175 गांव।

गांवों में करीब एक लाख 13 जनसंख्या, 135700 मवेशी।