बिहार में सत्ता कुमार की 8वीं शपथ आज

बिहार में सत्ता कुमार की 8वीं शपथ आज

पटना। बिहार की सियासत ने मंगलवार को एक बार फिर करवट ली। भाजपा से रिश्तों में तल्खी की खबरों के बीच नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। कुछ देर बाद ही उन्होंने लालू प्रसाद यादव की राजद और कांग्रेस समेत 7 दलों के 164 विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया। राज्यपाल फागू चौहान से मिलने नीतीश के साथ राजद नेता तेजस्वी यादव भी पहुंचे थे। बिहार में 7 बार मुख्यमंत्री बन चुके नीतीश आज 8वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। नीतीश के साथ ही राजद नेता तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम की शपथ लेंगे। दोपहर दो बजे राजभवन में शपथ समारोह का आयोजन किया गया है। सूत्रों ने बताया कि नई सरकार का फॉर्मूला तय हो गया है। इसमें राजद के सबसे ज्यादा 16 मंत्री बनाए जाएंगे।

सोनिया-राहुल से फोन पर की बात

शपथ ग्रहण से पहले नीतीश कुमार ने मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से फोन पर बात की। इससे पहले रविवार को भी नीतीश और सोनिया के बीच फोन पर बातचीत की खबर आई थी। हालांकि, तब इसकी पुष्टि नहीं हुई थी।

सत्ता के लिए पहले भी साथी बदलते रहे नीतीश

2013 भाजपा के साथ गठबंधन तोड़कर राजद से मिलकर सरकार बनाई। तब मोदी को पीएम उम्मीदवार घोषित करने का विरोध किया

2017 तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो राजद से गठबंधन तोड़ा और अगले ही दिन भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना ली।

2020 नवंबर में नीतीश ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई। इस चुनाव में भाजपा 74 और जदयू 45 सीटें जीती थी। इसके बाद भी भाजपा ने नीतीश को सीएम बनाया। लेकिन 21 महीने बाद ही एनडीए तोड़कर राजद, कांग्रेस और अन्य के साथ गठबंधन कर लिया।

भाजपा गठबंधन दलों को खत्म करती है : तेजस्वी

बदले सियासी घटनाक्रम के बाद नीतीश और तेजस्वी ने राजभवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। तेजस्वी यादव ने कहा- भाजपा का कोई गठबंधन सहयोगी नहीं है। भाजपा उन दलों को खत्म कर देती है जिनके साथ वह गठबंधन करती है। हमने देखा कि पंजाब और महाराष्ट्र में क्या हुआ था।

भाजपा ने कहा- नीतीश कुमार आदतन धोखेबाज

भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने नीतीश को आदतन धोखेबाज बताया। पार्टी सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा- 2017 में नीतीश साथ आए। 2019 में लोकसभा और 2020 में विधानसभा चुनाव भी मिलकर लड़ा। अब ऐसा क्या हुआ जो हम खराब हो गए। उन्होंने कहा- हम संघर्ष करेंगे।

भाजपा - जदयू के रिश्तों में कड़वाहट की प्रमुख वजहें

1. जदयू को मंत्री पद नहीं मिलना इस समय बिहार में दोनों दलों के 16- 16 लोकसभा सांसद हैं। जदयू भाजपा के बराबर मंत्री पद चाहती है, जबकि उसे सिर्फ एक मंत्री पद ही दिया गया है।

2. मंत्रियों पर नियंत्रण नीतीश चाहते हैं कि सरकार में बनने वाले मंत्रियों पर उनका नियंत्रण हो। जबकि भाजपा ने जदयू के कोटे से आसीपी सिंह को मंत्री बनाया। इस पर नीतीश की तल्खी दिखी थी।

3. नीतियों पर राय अलग जदयू ने अग्निपथ योजना का विरोध किया था। केंद्र सरकार वन नेशन वन इलेक्शन पर काम कर रही है। जदयू इससे सहमत नहीं है।

4. स्पीकर से रिश्ते ठीक न होना बिहार के स्पीकर विजय कुमार सिन्हा से भी नीतीश के रिश्ते ठीक नहीं हैं।