आत्महत्या करने आए 300 से ज्यादा लोगों की बचाई जान

आत्महत्या करने आए 300 से ज्यादा लोगों की बचाई जान

जबलपुर। आपको चोट लगेगी, आगे जाने में खतरा है। मैं भी तो आत्महत्या करने ही आया हूं, जैसी बातों में उलझाकर धुआंधार में आत्महत्या की कोशिश करने वालों को बचाने और नदी से दूर ले जाने वाले आरक्षक हरिओम अब तक 300 से ज्यादा लोगों को बचा चुके हैं। वे यहीं नहीं रुक जाते हैं, पीड़ितों को थाने भी पहुंचाते हैं, जिसके बाद उनकी काउंसलिंग की जाती है। हरिओम यह कार्य लगभग 7 साल से कर रहे हैं। उनका ट्रांसफर भी हुआ, लेकिन इसी बीच हादसे बढ़ने लगे, जिसके बाद फिर से उनका ट्रांसफर भेड़ाघाट थाने में कर दिया गया। आरक्षक हरिओम ने व्यापारियों और गोताखोरों को अलर्ट करके रखा है। यदि कोई भी व्यक्ति नदी की ओर जाते हुए दिखता है, तो उसकी सूचना तत्काल ही उनके पास पहुंच जाती है। इसके बाद वे मौके पर पहुंचकर किसी भी तरीके से आत्महत्या करने पहुंचे व्यक्ति को बचा लेते हैं।

घरेलू विवाद, मोबाइल पर बात या प्रेम प्रसंग बन जाते हैं कारण

अब तक 300 से ज्यादा लोगों को आत्महत्या की कोशिश करते हुए आरक्षक हरिओम ने बचाया है। उन्होंने बताया कि आत्महत्या के लिए जाने वाले लोगों में ज्यादातर युवतियां और महिलाएं होती हैं। इसके कारण घरेलू विवाद, मोबाइल पर बात करने पर परिवार की नाराजगी और प्रेमी से विवाद निकलकर आते हैं। आत्महत्या की कोशिश से रोकने के बाद काउंसलिंग की जाती है और उनका नंबर भी लिया जाता है। ऐसे लोगों से एक महीने तक बात करके हालचाल भी पूछा जाता है।

कई महत्वपूर्ण सम्मान हासिल : आरक्षक हरिओम को 2018 में राष्ट्रपति जीवन रक्षा पदक मिला, आईपीएस एसोसिएशन ने 2017 में सम्मानित किया, जिसमें डीजीपी ने 25 हजार का चेक प्रदान किया था। मानव अधिकार आयोग अध्यक्ष द्वारा भी उन्हें 2016 में सम्मानित किया गया।