झटका: अमेरिका की जीडीपी में 9.5 और जर्मनी में 10.1 फीसद की गिरावट

झटका: अमेरिका की जीडीपी में 9.5 और जर्मनी में 10.1 फीसद की गिरावट

वाशिंगटन। कोरोना वायरस अब इंसानों की जिंदगी ही नहीं दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को भी तबाह कर रहा है। इस वायरस की वजह से देश भर में व्यापार बंद होने तथा लाखों लोगों के घरों में ही कैद रहने के कारण अमेरिका, जर्मनी और मैक्सिको की अर्थव्यवस्था में तेजी से रिकॉर्ड गिरावट आई है। अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने गुरुवार को कहा कि देश की जीडीपी में दूसरी तिमाही में 9.5 प्रतिशत की गिरावट आई है। उधर यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कहे जाने वाले देश जर्मनी की इकॉनमी में दूसरी तिमाही में 10.1 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है। मैक्सिको में भी 10 फीसद से अधिक की गिरावट देखी गई। कोरोना संक्रमण चलते दोनों देशों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

अमेरिका में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट

अमेरिका ने 1947 के बाद से अर्थव्यवस्था का आधिकारिक रिकॉर्ड रखना शुरू किया है और उसके बाद से ये अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले सबसे बड़ी गिरावट साल 1958 में देखी गई थी, जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 10 फीसद की गिरावट दर्ज की गई थी। मौजूदा गिरावट पिछली बार की सबसे बड़ी गिरावट की तुलना में तीन गुना ज्यादा है।

जर्मनी का व्यापारिक निवेश और निर्यात बुरी तरह प्रभावित

जर्मनी में गुरुवार को संसद में जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक कोरोना महामारी ने लोगों के खर्च, व्यापारिक निवेश और जर्मनी से होने वाले निर्यात सभी को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। सरकार के सांख्यिकी विभाग का कहना है कि साल 1970 के बाद से जर्मनी ने इतनी तेज आर्थिक गिरावट नहीं देखी थी। अनुमान था कि जर्मनी की इकॉनमी में 9 फीसदी के करीब गिरावट हो सकती है, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे भी खराब दिख रही है। डेका बैंक के अर्थशास्त्री एंड्रियास शिउर्ले ने कहा, अब तो ये आधिकारिक है कि जर्मनी सदी की मंदी से गुजर रहा है। स्टॉक माकेंट गिरने या तेल की कीमतों में झटका लेने से भी जो चीज आज तक नामुमकिन दिख रही थीं, वो 160 नैनोमीटर के एक छोटे से जीव ने कर दिखाया है, जिसे हम कोरोना के नाम से जानते हैं। अप्रैल से जून की अवधि के दौरान जर्मनी के सकल घरेलू उत्पाद में 11.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। साल 2020 की दूसरी तिमाही में वस्तुओं और सेवाओं का आयात और निर्यात दोनों ही बुरी तरह से चरमरा गया है। हालांकि इस अवधि में सरकारी खर्चों में इजाफा दर्ज किया गया है।