कमलनाथ के भाजपा जॉइन करने की अटकलें, नकुल ने पर बायो बदला

सज्जन सिंह वर्मा सहित कई विधायकों के मोबाइल बंद रहे

कमलनाथ के भाजपा जॉइन करने की अटकलें, नकुल ने पर बायो बदला

भोपाल। मप्र सहित देशभर के सियासी गलियारों में दिनभर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता कमल नाथ और उनके सांसद बेटे नकुल नाथ के भाजपा में जाने की अटकलें चलती रहीं। दोनों नेताओं के दोपहर बाद एक साथ दिल्ली पहुंचने से इसे और बल मिल गया। हालांकि मीडिया से चर्चा में कमल नाथ ने अटकलों को खारिज करने के बजाए इतना भर कहा कि आप लोग क्यों उत्साहित हैं? ऐसा कुछ होगा तो पहले मीडिया को मैं ही बताउंगा। इधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह का कहना है कि ऐसी बातों में कोई दम नहीं है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि पूर्व सीएम नाथ की भाजपा नेतृत्व से बात हो चुकी है और संभवत:18 फरवरी को वह बेटे के साथ पार्टी जॉइन कर सकते हैं। दिल्ली में 18 तक भाजपा का राष्ट्रीय महाधिवेशन चल रहा है। इसलिए इसके एक दिन बाद धमाका करने की अटकलें है। नाथ के साथ करीब दो दर्जन विधायक, बड़ी संख्या में पूर्व विधायक और कांग्रेस नेताओं के दल छोड़ने की अटकलें दिन भर चलती रहीं।

कमलनाथ के कई समर्थक दिल्ली पहुंचे

अटकलों का बाजार इसलिए भी एकाएक गर्म हुआ जब सोशल मीडिया पर सांसद नकुल नाथ के स्टेटस से कांग्रेस का चिह्न ‘पंजा’ हट गया। इसी तरह पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने भी बदलाव कर दिया। कमल नाथ के समर्थक माने जाने वाले विधायकों के मोबाइल बंद आने लगे। पूर्व विधायक सुखदेव पांसे सहित अन्य कई समर्थक भी दिल्ली जा पहुंचे।

पार्टी छोड़ी तो यह बड़ा झटका हो सकता है

इस समय कांग्रेस के सबसे सीनियर नेता नाथ ही हैं जो इंदिरा-राजीव से लेकर सोनिया, राहुल गांधी के साथ काम करते रहे। केंद्र में कई मंत्रालयों के मंत्री, मप्र के सीएम और 9 बार सांसद रह चुके कमलनाथ कांग्रेस छोड़ते हैं तो पार्टी को यह अब तक का सबसे बड़ा झटका होगा।

ये हैं कमलनाथ के करीबी

निलय डागा, सुखदेव पांसे, लखन घनघोरिया, बाला बच्चन, राजेन्द्र मंडलोई, संजय उईके, सुनील उईके, सोहन वाल्मीकि, विजय चौरे, निलेश उईके, सुजीत चौधरी, कमलेश शाह, दिनेश गुर्जर, संजय उईके, मधु भगत, विवेक पटेल, भूपेंद्र गुप्ता, मुरैना और छिंदवाड़ा महापौर।

विधायक गए तो उपचुनाव

यदि कमलनाथ के साथ उनके समर्थक विधायक पाला बदलते हैं तो प्रदेश में उपचुनाव की स्थिति बन सकती है, जैसा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस से टूटने के समय हुआ था। दरअसल दलबदल कानून में अयोग्य होने से बचने के लिए नाथ को 44 विधायकों की जरूरत होगी।

ये खबरें निराधार हैं। ऐसा सपने में भी नहीं सोच सकते हैं कि इंदिरा जी का तीसरा बेटा कांग्रेस छोड़ सकता है...जिनके नेतृत्व में 2 महीने पहले हमने चुनाव लड़ा। जिन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए कांग्रेस के कार्यकर्ता अपना सब कुछ न्योछावर करता रहा। कमलनाथ, सिंधिया की तरह नहीं हैं। - जीतू पटवारी, अध्यक्ष, मप्र कांग्रेस

जिस व्यक्ति ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत नेहरू-गांधी परिवार के साथ की थी, वे उस समय उनके साथ खड़े थे जब पूरी जनता पार्टी और केंद्र की सरकार इंदिरा गांधी को जेल भेज रही थी। आप उनसे उम्मीद भी कैसे कर सकते हैं कि वे सोनिया गांधी के परिवार को छोड़कर जाएंगे? - दिग्विजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री

जब स्वाभिमान पर चोट लगती है तो व्यक्ति अपने फैसले बदल लेता है। जहां कमलनाथ, वहां हम, 40 साल से कमलनाथ के साथ हूं। - सज्जन वर्मा, पूर्व मंत्री लक्ष्य के आधे रास्ते पर जाकर कभी वापस न लौटें क्योंकि वापसी में भी आधा रास्ता तय करना पड़ता है। - प्रवीण कक्कड़ (कमलनाथ के सहयोगी)