टीवी सीरियल भी अब रियलिस्टिक जोन में आ रहे हैं : करुणा पांडे

टीवी सीरियल भी अब रियलिस्टिक जोन में आ रहे हैं : करुणा पांडे

‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में मेरा किरदार पुष्पा का ही है, जो एक मां है। वह अपनी शर्तों पर जीती है और अपने आत्मसम्मान को सबसे आगे रखती है। क्योंकि बचपन से लेकर शादी के बाद तक उसने संघर्ष देखा है, अब जब उसके जीवन में थोड़ा स्थायित्व आ रहा है और बच्चे अपने पैरों पर खड़े होने वाले हैं तो क्यों वो अपनी इच्छाएं मारे। यह कहना है, पुष्पा का किरदार निभा रही करुणा पांडे, जो कि सोनी सब टीवी पर नजर आ रही हैं। तीन बच्चों की मां का किरदार निभा रही करुणा कहती हैं, असल में मेरे बच्चे नहीं है लेकिन स्त्री होने के नाते ममता तो मेरे भीतर है, इसलिए यह किरदार कर रही हूं। कई बार इस शो में बच्चे मां को झिड़कते हैं, उन्हें मां की एजुकेशन, स्नैक्स बेचने के काम में शर्म आने लगती है, तब वो कहती हैं, यह बड़े-बड़े स्कूल में पढ़ रहे हो न, यहीं ये सामान बेचकर तुम्हारी फीस जमा की है। करुणा कहती हैं, अब टीवी शो में कहानी को कहने का तरीका चेंज हुआ है और अब सब कुछ रियलिस्टिक जोन में आता जा रहा है। शो में बात करने से लेकर चलने का तरीका तक रियल बनाया जा रहा है। हमारा शो ड्रामा है लेकिन हमने इसे मेलोड्रामा नहीं बनने दिया।

मां का सपना मैंने पूरा किया

मैं राजस्थान से हूं लेकिन बचपन में ही परिवार मुंबई शिट हो गया था। मेरा मां एक्ट्रेस बनना चाहती थीं लेकिन उनके समय में परिवार इससे सहमत नहीं था, तो उन्होंने मेरे लिए सपना देखा और 6 वीं क्लास से मेरे पोर्टफोलियो बनवाने लगीं और धीरे- धीरे कुछ रोल मुझे मिलने लगे। मुझे भी लगा कि मम्मी जो कर रही हैं वो सही होगा और मुझे भी एक्टिंग में मजा आने लगा। यह कहना है, शो में दीप्ति का किरदार निभा रही गरिमा परिहार का। अब मैं जल्दी ही नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज में नजर आउंगी।

जम्मू में टेंट में हुआ मेरा जन्म

शो में पुष्पा के बड़े बेटे अश्विन का किरदार निभा रहे नवीन पंडित कहते हैं, मैं कश्मीरी पंडित हूं और मुझे इस पर गर्व है कि हमें मिटाने की कोशिश के बाद भी हम पर्वत की तरह अटल खड़े हैं और हमें कितनी बार भी मिटाया जाए हमारी तादात कम हो जाएंगी लेकिन हमारा जेनेटिक स्ट्रक्टर कुछ ऐसा कि हर कश्मीरी पंडित कुछ न कुछ बनकर ही दुनिया के सामने आया। कश्मीर फाइल्स फिल्म की बात करूं तो जो मैंने अपने परिवार से सुना है उसके मुताबिक फिल्म में सिर्फ 5 फीसदी ही हकीकत बयां की गई है, जो झेला है वो अकल्पनीय है। मैं 1990 में जम्मू नगरोटा कस्बे में टेंट में पैदा हुआ क्योंकि हमारा परिवार भी जान बचाकर कश्मीर से यहां पहुंचा था। मेरे परिवार के 8 लोग दो साल टेंट में रहे। टेंट में रहने के दो साल बाद 12 साल हम वन रूम टेनामेंट में रहे जो कि ऐसा कमरा था जो घुसते ही खत्म हो जाता था, जब घर की महिला को नहाना होता था तो कमरे से सब बाहर निकलते, अपने गद्दे समेटकर ऊंचाई पर रखते ताकि भीग न जाएं फिर कमरे को सुखाते थे। फिर मैंने जम्मू से पढ़ाई के बाद देहरादून से इंजीनियरिंग की। इंफोसिस में तीन साल जॉब करने के बाद मेरे मैनेजर्स ने ही मुझे कहा कि मुझे एक्टिंग फील्ड में जाना चाहिए और फिर मैंने जॉब छोड़ मुंबई का रूख किया।