देर तक मोबाइल देखने से हो रही टेक नेक सिंड्रोम बीमारी, बच्चे इससे ज्यादा पीड़ित

देर तक मोबाइल देखने से हो रही टेक नेक सिंड्रोम बीमारी, बच्चे इससे ज्यादा पीड़ित

नई दिल्ली। अमेरिका के प्लास्टिक सर्जन डॉ. रिचर्ड वेस्ट्रीच ने स्मार्टफोन के अधिक यूज से नए तरह की बीमारी के बारे में बताया है। डॉ. रिचर्ड का कहना है कि स्मार्टफोन के अधिक यूज से हाथ के सुन्न होने के साथ ही झुनझनी देखने को मिल रही है। यह टेक नेक नया कार्पल टनल सिंड्रोम है। इस सिंड्रोम में सिरदर्द, गर्दन और कंधे में दर्द और हाथों में झुनझुनी पैदा हो जाती है। भारत में भी टेक नेक (जिसे टेक्स्ट नेक भी कहा जाता है) काफी आम है। डॉक्टरों का कहना है कि ओपीडी में आने वाले मरीजों में लगभग 20 प्रतिशत मरीज टेक नेक से पीड़ित हैं। इनमें से अधिकांश बच्चे हैं। बच्चे अब अधिक समय गैजेट के साथ बिता रहे हैं। जो टेक नेक बीमारी होने का कारण अधिकांश जीवनशैली से संबंधित हैं।

बच्चों, किशोरों में बढ़ रहे केस

दिल्ली में आकाश हेल्थकेयर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में सीनियर कंसल्टेंट और हेड, आथोर्पेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट, डॉ. आशीष चौधरी कहते हैं कि आनलाइन स्कूल की वजह से लैपटॉप, लैपटॉप पर बैठने और काम करने के घंटे बढ़ गए हैं। इससे खराब पोस्चर, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, धूप ना लगना और खराब खान-पान कुछ ऐसी चीजें हैं जिससे टेक नेक की आशंका बढ़ जाती है।

व्यक्ति के मनोविज्ञान को प्रभावित करता है यह दर्द

इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर डॉ एच एस छाबड़ा ने कहा कि लैपटॉप पर काम करने या मोबाइल पर लगातार टेक्स्ट करने से गर्दन के लिगामेंट्स, मांसपेशियों और जोड़ों पर बहुत अधिक जोर पड़ता है। ऐसा खासकर तब होता है यदि आपका पोस्चर सही नहीं है। इनमें खिंचाव हो सकता है और गर्दन में दर्द हो सकता है। चूंकि गर्दन की मांसपेशियां अकड़ जाती हैं। इससे वे खोपड़ी से जुड़ाव के स्थान पर सूजन हो सकती है। ऐसी स्थिति समय में यह दर्द लंबे समय तक रहने पर व्यक्ति के मनोविज्ञान को भी प्रभावित करता है।

सिर को आगे झुकाने से रीढ़ पर बढ़ जाता है वजन

इंटरनेशनल जर्नल आॅफ एनवायर्नमेंटल हेल्थ एंड पब्लिक हेल्थ में कहा गया है कि जब सिर को आगे झुकाया जाता है तो रीढ़ पर सिर का वजन बढ़ जाता है। वास्तव में, तटस्थ स्थिति में एक पूर्ण विकसित सिर का वजन लगभग 5 किलोग्राम होता है। सिर जितना अधिक झुका होता है, गर्दन पर दबाव उतना ही बढ़ जाता है। वास्तव में, लगातार आगे की तरफ झुकाव से सर्वाइकल स्पाइन, कर्वेचर, सहायक लिगामेंट, टेंडन, मस्कुलेचर, बोनी सेगमेंट को बदल सकता है।

6 से 8 घंटे बढ़ गया है स्क्रीन का औसत समय

एम्स में प्रोफेसर और आॅथोर्पेडिक्स के प्रमुख डॉ. राजेश मल्होत्रा कहते हैं कि कई लोग जो लंबे समय तक लैपटॉप पर काम करते हैं या स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, उनका प्रोफाइल नेक फॉरवर्ड हो जाता है। उन्होंने कहा कि स्क्रीन पर औसत समय छह से आठ घंटे तक बढ़ गया है। यह निश्चित रूप से खराब पोस्चर और इससे जुड़ी परेशानियों को बढ़ा देते हैं। लोगों को ऐसे गैजेट का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।