पिता ने कहा था शादी के बाद अपने-अपने घर में रहो, क्योंकि हर महिला चाहती है उसका खुद का घर हो

पिता ने कहा था शादी के बाद अपने-अपने घर में रहो, क्योंकि हर महिला चाहती है उसका खुद का घर हो

 जब हम तीनों भाई घर पर एक साथ होते हैं तो फिल्मों को लेकर बहुत कम बात की जाती है। पर्सनल लाइफ के बारे में ज्यादा बात करते हैं। वहीं पिता कहते हैं कि तुम्हें पढ़ाया लिखाया है, तो अपने जीवन के निर्णय खुद ही लो। हर चीज के लिए मेरे पास आओंगे, तो तुम कैसे आगे बढ़ोगे। गलतियां करो और सीखो, जहां मेरे अनुभव की जरूरत है तो मेरे पास आओ, लेकिन कल मैं नहीं रहा तो फिर तुम क्या करोगे। यह कहना था, बॉलीवुड एक्टर, डायरेक्टर अरबाज खान का, जो कि इन दिनों भोपाल में अपनी फिल्म पटना शुक्ला की शूटिंग के लिए आए हुए है, इस दौरान आईएम भोपाल से खास बातचीत में उन्होंने जीवन से जुड़े कई अनुभव शेयर किए। अरबाज कहते हैं कि मैंने खुद राइटिंग के लिए कभी ट्राई नहीं किया, राइटिंग ऐसी चीज है, जिसके लिए समय देना होता है। पिता कहते है कि राइटिंग को पेपर पर लिखना होता है। विचार के लिए एकांत जगह होना चाहिए। हम साथ हैं लेकिन साथ में नहीं रहते : सिंगल फैमिली के सवाल पर अरबाज ने कहा कि हम साथ में है, लेकिन साथ में रहते नहीं है। जब हम यंग थे तो पिताजी के साथ रहते थे। लेकिन पिताजी ने कहा कि जब तुम्हारी शादी हो जाएगी तो तैयारी कर लो अलग रहने की क्योंकि हर महिला चाहती है कि उसका खुद का घर हो। उन्होंने कहा कि तुम रोज घर आओ, सुबह से शाम तक रहो, लेकिन अपने घर जरूर जाओ। अपने आप को पहचाना बहुत जरूरी : अरबाज कहते हैं कि मेहनत करो, अपने पैशन को फॉलो करो। कई बार ऐसा होता है कि आप में हुनर किसी ओर चीज का है और आपका शौक कुछ ओर होता है। इसलिए अपने आपको पहचाना बहुत जरूरी है। अब बहुत से आॅप्शन हो गए है।

ओटीटी से आर्टिस्ट उभरकर आए हैं

ओटीटी के सवाल पर अरबाज कहते हैं कि ओटीटी में स्पेस बहुत है जबकि फिल्म 2 घंटे से ज्यादा नहीं होती। ओटीटी में एक्टर को समय बहुत मिलता है, जिसका फायदा कई आर्टिस्ट को मिला है, जो कि फिल्मों में नहीं मिल पा रहा था। कई ऐसे आर्टिस्ट उभरकर आए है, जो बहुत बेहतर काम कर रहे है। वहीं साउथ की फिल्मों का बढ़ते क्रेज पर अरबाज कहते हैं कि अच्छी फिल्में आ रही है, यही कारण है कि लोग उसे पसंद कर रहे है। अच्छा कंटेंट होगा तो फिल्म जरूर चलेगी, उसे लोग भी पसंद करेंगे।

किसी एक सीन की वजह से बायकॉट करना गलत

अरबाज कहते हैं कि हर गलती की एक सजा होती है। मर्डर करने वाले को भी 15 साल की सजा काटने के बाद रिहा कर दिया जाता है, लेकिन किसी एक सीन की वजह से फिल्म और एक्टर को बायकॉट करना कैंसिल कल्चर को रिप्रेजेंट करता है। अरबाज कहते हैं कि कॅरियर की शुरुआत में ही मुझे खिलाड़ी फिल्म आॅफर हुई थी। तब मैं किसी दूसरी फिल्म की शूटिंग में बिजी था, तो उसे रिजेक्ट कर दिया था। बाद में खिलाड़ी एक हिट मूवी साबित हुई और जिस फिल्म की वजह से छोड़ा था वह कभी रिलीज ही नहीं हुई।