गुरू पूर्णिमा की चमक फीकी, संत बोले, घर से ही करो आराधना

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गुरू पूर्णिमा की चमक फीकी, संत बोले, घर से ही करो आराधना

ग्वालियर। गुरुपूर्णिमा पर गुरुओं की चरण वंदना और उनका आर्शीवाद लेने के लिए सनातन काल से आश्रम में अनुयायियों के मेला भरते रहे हैं लेकिन कोरोना महामारी के चलते इस बार चमक फ ीकी हो गई है। नशामुक्ति के लिए आंदोलन छेड़ने वाले हरिहरगिरी जी महाराज के आश्रम में भक्तों को न आने के लिए कहा है तो दंदरौआ के महंत रामदास महाराज ने भी भक्तों से घर पर रहकर ही आराधना करने का आह्वान किया है। हालांकि दंदरौआ के महंत का कहना है कि डॉ.हनुमान ने सदैव भक्तों की बीमारी दूर करते रहे हैं। कोरोना को भी दूर भगाएंगे।

भक्त घर पर रहें, मंदिर के लिए मना नहीं : रामदास महाराज
प्रसिद्ध दंदरौआ धाम के महंत रामदास महाराज का कहना है कि आश्रम (मंदिर) में गुरु पूर्णिमा का कोई विशेष उत्सव नहीं है। भक्तगण घर पर रहकर ही चित्र के सामने बैठकर पूजा अर्चना करें और दान दक्षिणा अर्पित करें। हां अगर कोई भक्त मनाही के बाद भी मंदिर आ जाएगा तो उसे रोका नहीं जाएगा। प्रबंधकों ने महंत जी  आसंदी से दूरी रखने के लिए रेलिंग लगवाई है। दंदरौआ की ख्याति डा.हनुमान से है।
संदेश : कोरोना महामारी विश्व त्रासदी के रूप में हमारे सामने है। इससे बचाव के लिए घर पर ही रहना ज्यादा श्रेयस्कर है। हां अगर बहुत जरूरी है तभी घर से बाहर निकलें। सस्वर, मन से किसी भी स्थान पर रहकर पूजा-अर्चना की जाए गुरु को स्वीकार होती है।

आध्यात्म निकेतन में भक्त आएंगे पर बैठेंगे नहीं: संत कृपाल
बहोड़ापुर में आध्यात्म निकेतन के प्रति लोगों की अगाध श्रद्धा है। संत कृपाल सिंह की पूजा अर्चना के लिए काफी लोग पहुंचते हैं। इस बार निकेतन के प्रबंधकों ने व्यवस्था की है कि आसपास के भक्तगण आएंगे तो उन्हें सीधे गुरु महाराज की समाधि तक जाने दिया जाएगा और वे वापसी में बैठेंगे नहीं। इस तरह से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी रहेगा और भक्तगण अपने गुरु महाराज के दर्शन भी कर पाएंगे।
संदेश : संत कृ पाल सिंह का अपने भक्तों को संदेश है कि वे अंर्तमुखी होकर ध्यान करें । घर पर रहकर पूजा -अर्चना भी भगवान और गुरू दोनों ही स्वीकार कर लेते हैं। 

आश्रम में कोई उत्सव नहीं, घर पर पूजा करें :हरिहरगिरी 
नशामुक्ति, बहुभोज प्रथा और दहेज के खिलाफ अभियान छेड़कर सुर्खियों में आए हरिहरगिरी महाराज की समाज में अच्छी पैठ है। धौलपुर में चंबल नदी किनारे आश्रम बनाकर निवास करते हैं। गुरुपूर्णिमा पर उनके हजारों शिष्य पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं लेकिन इस बार आश्रम से मना कर दिया गया है कि कोई उत्सव नहीं होगा। भक्तगण घर पर रहकर पूजा करें, हमें सब मान्य होगा।
संदेश : कोरोना की महामारी से देश और दुनियां त्रस्त है। इससे बचाव के लिए घर पर रहना ही श्रेयस्कर है। गुरु पूर्णिमा के रोज गुरू की पूजा का महत्व है इसलिए घर पर ही पूजा करें। आश्रम में कोई भी भक्त आने का कष्ट नहीं करे।