प्रधानमंत्री मोदी ने सफलता का जो मंत्र दिया, वह जीवन भर हमारे साथ रहेगा

प्रधानमंत्री मोदी ने सफलता का जो मंत्र दिया, वह जीवन भर हमारे साथ रहेगा

 मा ननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पैरालिंपिक खेलों के प्रति जो दृष्टिकोण है, उन्होंने मुझ जैसे कई अन्य खिलाड़ियों को तमाम विषमताओं के बावजूद, जोश के साथ आगे बढ़ने का जो जज्बा दिया है, उसे केवल शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। पैरालिंपिक खेलों और एथलीटों को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जो प्रोत्साहन दिया गया, वह अभूतपूर्व है। टॉप्स- (ळडढर यानि टारगेट ओलिांपक पोडियम स्कीम) जैसी योजनाओं के माध्यम से पैरा ओलिंपियंस को नियमित कोचिंग कैंप, कोच द्वारा प्रशिक्षण, विदेश प्रवास और ट्रेनिंग, अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने और पदक विजेताओं को नकद राशि पुरस्कार द्वारा सम्मान देने का कार्य नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में खेल विभाग द्वारा लगातार किया जा रहा है। प्रदेश में भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के विशेष प्रयास से मप्र शूटिंग अकादमी भोपाल द्वारा खिलाड़ियों को खेल के संसाधन जैसे बंदूकें, गोलियां, आवास, परिवहन और विशेषज्ञ कोच जैसी सुविधाएं मुहैया कराईं जा रहीं हैं, ताकि सभी खिलाड़ी भविष्य में अपने प्रदर्शन से देश के लिए पदक जीतकर देश का मान बढ़ा सकें। मैंने अपने खेल जीवन की शुरुआत वर्ष 2015 में 15 वर्ष की आयु में की। सपना था कि खेल के क्षेत्र में आगे बढ़कर देश का प्रतिनिधित्व करूं, पर ‘गतिभंग’ यानि एटेक्सिया जैसी शारीरिक अक्षमता इस सपने को पूरा करने में एक बड़ी बाधा थी। पर कहते हैं कि लक्ष्य के प्रति जूनून और मेहनत से अपनी मनचाही दिशा पा सकते हैं। मैंने अपने जीवन में पहली बार गन उठाई और ट्रायल के 5 निशानों में से 4 को अपने लक्ष्य पर भेद कर विद्यालयीन स्तर अपने चयन को सुनिश्चित कर लिया। वर्ष 2017 आते-आते मैंने मप्र शूटिंग अकादमी में भाग लेने के लिए आवेदन भरा, जिसमें चयनित होकर आगे की अपनी शूटिंग की तैयारियां शुरू कर दीं। मैंने अपने लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित किया और पैरालिम्पिक टोक्यो 2020 पी 2-10 मीटर एयर पिस्टल में क्वालीफाई करने वाली देश की पहली महिला पैरा शूटर बन गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पैरालिंपिक खेलों के सभी प्रतिभागियों से मुलाकात की। इससे पहले केवल पदक जीतने वाले विजेताओं को ही प्रधानमंत्री से मिलने का अवसर मिलता था पर मोदी जी के द्वारा किया गया यह कार्य एक बदलाव लेकर आया है, जो प्रसन्नता का विषय है। पैरालिंपिक प्रतियोगिता में जाने से पहले उन्होंने सभी खिलाड़ियों से चर्चा कर परिणाम की चिंता किए बगैर मेहनत से अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की महत्वपूर्ण सलाह दी। इसी हौंसले को प्रेरणा बनाकर मैं आज भी कठिन परिश्रम कर अपने लक्ष्य को पूरा करने की कोशिश कर रही हूं और वर्ष 2024 में पेरिस में आयोजित होने वाले पैरालिंपिक खेलों में गोल्ड मैडल जीतने की तैयारी में लगी हूं। मोदी जी ने जो मंत्र हमें दिया है, वह जीवन भर हमारे साथ रहेगा। हार या जीत से अधिक महत्वपूर्ण है लक्ष्य प्राप्ति के लिए लगातार मेहनत करते रहना और मैं यह करती रहूंगी। सरकार ने टारगेट ओलिंपिक पोडियम योजना जैसी अच्छी योजनाएं शुरू की हैं, जिन्हें टॉप्स के नाम से भी जाना जाता है। टॉप्स की मदद से मैंने अपनी मुश्किलों को दूर किया और अपने उन लक्ष्यों को हासिल किया जिनके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था। एक स्पोर्ट्स पर्सन होने के नाते मैं खेल के प्रति प्रधानमंत्री जी के दृष्टिकोण की सराहना करती हूं। जीत और हार में भेदभाव किये बगैर निरंतर खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और समर्थन देने के लिए मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रख मोदी जी को दिल से धन्यवाद देती हूं। मध्यप्रदेश आगमन पर मैं उनका हार्दिक स्वागत करती हूं और जन्मदिन के अवसर पर उन्हें शुभकामनाएं देती हूं।