रंगकर्मियों का दर्द विभाग ने दो साल से आवेदन तो मंगाए लेकिन नहीं दिया अनुदान

रंगकर्मियों का दर्द विभाग ने दो साल से आवेदन तो मंगाए लेकिन नहीं दिया अनुदान

प्रदेश की कला, साहित्य, संस्कृति और रंगमंच के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाओं के संवर्धन के लिए राज्य सरकार द्वारा अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। इन संस्थाओं को अनुदान संस्कृति विभाग द्वारा दिया जाता है लेकिन पिछले कुछ समय से अनुदान राशि न प्राप्त होने के कारण प्रदेश की तमाम सांस्कृतिक क्षेत्रों में कार्य करने वाली संस्थाएं परेशान हैं। दरअसल, मप्र संस्कृति विभाग की ओर से कोरोनाकाल के दौरान पहले से ही संस्थाओं को अनुदान नहीं दिया गया। कोरोना नियंत्रण होने के बाद विभाग की ओर से संस्थाओं से अनुदान के लिए आवेदन मांगे गए लेकिन संस्कृति विभाग ने पिछले वर्ष मंगाए गए आवेदनों पर विचार ही नहीं किया। संस्कृति विभाग द्वारा हर वर्ष लगभग 3 करोड़ रुपए से अधिक का राशि प्रदेश की संस्थाओं को अनुदान के रूप में वितरित की जाती है। इसी मुद्दे को रंगकर्मी प्रियंका शक्ति ठाकुर ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उठाया है। जहां उन्होंने लिखा है कि संस्कृति विभाग द्वारा हर वर्ष कला संस्थाओं को अनुदान के रूप में दिया जाता था। जिससे वो सांस्कृतिक समितियां व संस्थाएं अपने वर्ष भर के कार्यक्रमों का कैलेंडर तैयार कर गतिविधियां सुनिश्चित कर पाती थी। विभाग पिछले दो वर्षों से लगातार विज्ञापन जारी कर आवेदन तो आमंत्रित कर रहा है, लेकिन अब तक किसी को भी अनुदान जारी नहीं किया गया।

पुराने का पेमेंट हुआ नहीं, नए के आवेदन मंगाए

संस्कृति विभाग ने कई संस्थाओं को साल 2020- 21 व 2021-22 का अनुदान नहीं दिया है। यानी विभाग ने पिछले वर्ष के दौरान मंगाए गए आवेदनों का भुगतान तो किया नहीं, वहीं वर्ष 2022-23 के अनुदान के लिए आवेदन आमंत्रित करने के लिए विज्ञापन जारी कर दिया। सूत्रों के अनुसार विभाग के अधिकारियों ने पुराना अनुदान दिया नहीं और नए के लिए विज्ञापन जारी कर दिया जिसके कारण संस्थाओं को परेशानी से जूझना पड़ रहा है। कुछ कलाकारों को अनुदान मिला भी है लेकिन देरी से।

5 हजार से 4 लाख रुपए तक मिलता है अनुदान

???? संस्कृति विभाग द्वारा लगभग 300 से अधिक संस्थाओं को हर वर्ष अनुदान राशि दी जाती है।

????????यह भुगतान राशि 5 हजार से लेकर लगभग 4 लाख रुपए तक होती है।

????????इसमें साहित्य, रंगमंच, कला, सामाजिक स्तर पर कार्य करने वाली संस्थाएं शामिल होती हैं। 

????????संस्थाओं को दी जाने वाली राशि का वितरण विभाग द्वारा बनाई गई कमेटी के सदस्य संस्था के कार्य स्तर के आधार पर करते हैं।

???? सबसे ज्यादा रंगमंच के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाओं को अनुदान मिलता है।

???????? साहित्य के क्षेत्र में भी राशि वितरित की जाती है।

कलाकारों का दर्द समझे संस्कृति विभाग

मैंने जो फेसबुक पोस्ट पर लिखा है उससे कई ऐसे रंगकर्मी अपने आप को रिलेट कर पा रहे हैं क्योंकि उन्हें संस्कृति विभाग से मिलने वाली अनुदान राशि पिछले दो सालों से नहीं मिली है। बहुत सारे कलाकार सिर्फ अनुदान राशि पर ही काम कर रहे हैं और वो अभी तक नहीं मिली है जोकि गलत है। साथ ही कुछ संस्थाओं को अनुदान राशि में भी भेदभाव किया जा रहा है किसी को 3 लाख तो किसी को मात्र 20 हजार रुपए मिलते हैं। - प्रियंका शक्ति ठाकुर, रंगकर्मी

ग्रांट तो मिल रही है,लेकिन कुछ देरी से

इस समय लगातार नाट्य संस्थाओं को अनुदान राशि मिल रही है। कोरोना की वजह से कुछ देरी हुई है। अनुदान करने वालों की फाइल्स बैकलॉग में जरूर हो गई है। साथ ही इस बार रेपेट्री की ग्रांट कमीशन की भी राशि दी जा रही है। साथ ही बहुत समय से इंस्पेक्शन नहीं हुए हैं, बावजूद इसके अनुदान राशि दी जा रही है। एक प्रथा भी है कि जब रेपेट्री ग्रांट जब होती है उसपर इंस्पेक्शन किया जाता है वो नहीं हो पा रहा है जिस वजह से देरी हो रही है। - राजीव वर्मा, रंगकर्मी

अनुदान राशि देने में न किया जाए भेदभाव

मैंने दो साल से अनुदान राशि के लिए अप्लाई कर रखा है लेकिन अभी तक कोई राशि प्राप्त नहीं हुई है। फिर भी हमने अपना काम नहीं रोका है लगातार दो साल से बच्चों के साथ जगह-जगह जाकर परफॉर्म भी कर रहे हैं। कभी अपने प्रोग्राम निरस्त नहीं किए अपने दम पर जितना कर सकते हैं, उतना कर रहे हैं। साथ ही बहुत सारी ऐसी संस्थाएं भी है जिन्हें अच्छी खासी राशि का अनुदान मिलता है और हमें कम राशि। यह भेदभाव भी नहीं होना चाहिए। - प्रेम गुप्ता, रंगकर्मी