शिक्षकों के ट्रांसफर में मंत्री विधायकों की भूमिका खत्म

शिक्षकों के ट्रांसफर में मंत्री विधायकों की भूमिका खत्म

भोपाल। हरियाणा की तर्ज पर मप्र में पहली बार शिक्षकों के लिए स्थायी ट्रांसफर पॉलिसी अगले सत्र से लागू होगी। स्वैच्छिक ट्रांसफर के लिए शिक्षक आॅनलाइन आवेदन करेंगे। शिक्षक और अन्य संवर्ग के तबादले 15 मई तक किए जा सकेंगे। यह निर्णय मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में लिया गया। नई नीति लागू होने से ट्रांसफर में प्रभारी मंत्रियों का रोल खत्म हो जाएगा। विधायकों की सिफारिशों पर भी ट्रांसफर नहीं होंगे। इसे लेकर कैबिनेट में कुछ मंत्रियों ने आपत्ति भी जताई। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि पॉलिसी को कैबिनेट ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है। इसके तहत दूसरे जिले या संभाग के शिक्षक को प्रमोशन के पद पर पदस्थ नहीं किया जा सकेगा। पहले प्रशासनिक और उसके बाद स्वैच्छिक ट्रांसफर होंगे। गंभीर शिकायतों, प्रतिनियुक्ति से वापसी, कोर्ट निर्णय के पालन और स्कूलों में खाली पद भरने के लिए प्रशासनिक स्तर पर ट्रांसफर होंगे। मंत्रियों के स्टाफ में शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगेगी।

परमार जी, व्यावहारिक पॉलिसी लागू करें : सीएम

शिक्षकों की ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार प्रेजेंटेशन दे रहे थे, तभी मंत्री गोपाल भार्गव समेत कुछ मंत्रियों ने आपत्ति उठाई। पढ़ें, किसने क्या कहा...

???? गोपाल भार्गव : आॅनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के बाद तो प्रभारी मंत्रियों के पास जिलों में ट्रांसफर करने का अधिकार नहीं रहेगा?

???? नरोत्तम मिश्रा : यह पॉलिसी अव्यवहारिक है, इससे विधायक या जनप्रतिनिधि किसी भी शिक्षक की सिफारिश नहीं कर सकेंगे। इस बीच स्कूल शिक्षा मंत्री परमार ने अपनी बात रखी। तब सीएम ने टोका।

???? शिवराज सिंह चौहान (सीएम) : परमार जी ट्रांसफर की व्यवहारिक पॉलिसी लागू की जाए।

नई ट्रांसफर पॉलिसी

???? नई ट्रांसफर पॉलिसी के तहत 31 दिसंबर तक स्कूलों में प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद 15 जनवरी को पोर्टल आॅन होगा।

???? शिक्षक 31 मार्च तक ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद 15 मई तक ट्रांसफर आदेश होंगे।

???? उच्च श्रेणी शिक्षक का ट्रांसफर राज्य स्तर पर, जबकि माध्यमिक का संभाग और प्राथमिक का जिले में होगा।

???? विधायक शिक्षक की शिकायत कर सकेंगे, लेकिन ट्रांसफर के लिए सिफारिश नहीं कर सकेंगे।

???? 2001 में नियुक्त शिक्षकों को 5 साल और 2008 में नियुक्त शिक्षकों को 7 साल गांवों में सेवा देनी होगी।

???? 2013 से 2018 के बीच नियुक्त सभी श्रेणी के शिक्षकों को 10 साल ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देनी होगी।

देसी गाय पालन : 26 हजार किसानों को " 900 प्रतिमाह

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने देसी गाय पालने वाले किसान को हर माह 900 रुपए अनुदान मिलेगा। पहले चरण में हर जिले के 100 गांवों का चयन किया गया है। यानी 5,200 गांवों में से हर गांव के 5 यानी 26 हजार किसानों को लाभ मिलेगा।

स्ट्रीट वेंडर स्कीम की अवधि दो साल और बढ़ाने की मंजूरी

सीएम ग्रामीण स्ट्रीट वेंडर स्कीम में 31 मार्च 2024 तक वृद्धि की गई है। इसके तहत हर साल 2 लाख ग्रामीण स्ट्रीट वेंडर्स को 10 हजार रुपए का ब्याज मुक्त लोन सरकार दिलाएगी। दो साल में सरकार ने 3.14 लाख वेंडर्स को यह लोन दिलाया है।

किसानों को मास्टर ट्रेनिंग, हर माह 1,000 रुपए मानदेय

प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए पोर्टल तैयार किया गया है। इस पर पंजीकृत किसानों को मास्टर ट्रेनर एवं ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। मास्टर ट्रेनिंग को हर माह एक हजार रुपए मानदेय दिया जाएगा। ये प्राकृतिक प्रेरक कहलाएंगे।