गर्मी शुरू होते ही प्रदेश में गहराने लगा जल संकट

गर्मी शुरू होते ही प्रदेश में गहराने लगा जल संकट

भोपाल। प्रदेश में गर्मी शुरू होते ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराने लगा है। जल स्तर भी धीरे- धीरे गिरने लगा है। शहरी क्षेत्रों में पानी की समस्या को लेकर प्रतिदिन सौ से ज्यादा शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पांच सौ से अधिक जल स्रोतों का स्तर नीचे जाने से परियोजनाएं बंद हो चुकी हैं। पेयजल की समस्या सबसे ज्यादा सागर, छिंदवाड़ा और उज्जैन जिलों के निकायों में आ रही है। इन जिलों के निकायों में पानी सप्लाई के ड्यूरेशन और कम प्रेशर में पानी मिलने की शिकायतें आ रही हैं। हालांकि निकायों ने अभी तक जल संकट के संबंध में विभाग के पास कोई रिपोर्ट नहीं भेजी है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कुछ निकायों में पानी की समस्याएं बनीं रहती हैं, लेकिन अभी तक किसी भी निकाय ने पानी के नाम पर अलग से बजट की डिमांड नहीं की है। उधर विभाग के डैशबोर्ड से पता चलता है कि पिछले दो माह में 6 हजार से अधिक शिकायतें लोगों ने पानी की समस्या को लेकर दर्ज कराई हैं। छतरपुर जिले के बक्स्वाहा से मनीष जैन ने बताया कि पूरे इलाके में अभी से जल संकट गहराने लगा है। वहीं, पानी की समस्या को लेकर अकेले इसी माह में 3 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं। सबसे ज्यादा शिकायतें इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जिले के शहरी क्षेत्रों से आई हैं।

घर-घर नल से पानी की आस

ग्रामीण क्षेत्रों में भी जल संकट गहराने लगा है। क्योंकि इन क्षेत्रों में खुद के लिए पीने के पानी के अलावा मवेशियों के लिए भी जरूरत होती है। वर्तमान में विभाग की 9 सौ से अधिक ग्रामीण जल परियोजनाएं बंद हैं। वहीं 513 परियोजनाएं जल स्रोत सूखने के चलते बंद हो चुके हैं। इन परियोजनाओं के आस-पास जल स्रोतों की तलाश की जा रही है, जिससे घर-घर नल जल योजनाओं के माध्यम से इन परियोजनाओं को पुन: शुरू किया जा सके। मोटर पंप और बिजली की लाइन खराब होने के साथ अन्य कारणों से परियोजनाएं संचालित नहीं हो पा रही हैं।